पकंज उपाध्याय और मिथिलेश सिंह की फाइल फोटो

बक्सर खबर। सदर प्रखंड के रामोबरिया गांव में भू-खंड को लेकर दो नेता आमने-सामने हैं। लोक चेतना मंच के नेता मिथिलेश सिंह व कांग्रेस के युवा नेता पंकज उपाध्याय। इन दोनों ने एक दूसरे के उपर गंभीर आरोप लगाए हैं। पंकज को मिथिलेश सिंह ने भू माफिया, पशु तस्कर तक कहा है। क्योंकि वे रामोबरिया पैक्स अध्यक्ष के साथ मिलकर उनकी जमीन हड़पना चाहते हैं। इन दोनों के बीच डीसीएलआर के कार्यालय में वाद चल रहा है। जिसकी पुष्टि डीसीएलआर द्वारा डीएम को लिखे पत्र में हो चुकी है।

पहले मिथिलेश सिंह ने डीसीएलआर पर हमला बोला। जहां से विवाद ने राजनीतिक रुप ले लिया। डीसीएलआर ने भी डीएम को पत्र लिख पूरी बात सामने रख दी। इस बीच पंकज उपाध्याय का नाम सामने आया। पंकज ने भी मिथिलेश सिंह पर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार मिथिलेश सिंह का यही पेशा है। लोगों को झूठे मुकदमे में फंसा कर धन की उगाही करना। ऐसे ही एक मामले में न्यायालय ने उनके उपर गलत मुकदमा दायर करने के कारण जुर्माना भी लगाया था। इनका यही पेशा है।

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जिस जमीन पर वे अपना दावा कर रहे हैं। वह उनकी नहीं डुमरांव महाराज की थी। जिसे उन्होंने रमदहिन उपाध्याय से खरीदने का दावा किया है। जबकि सच्चाई यह है कि जमीन डुमरांव महाराज ने अपने यहां काम करने वाले अदालत दुसाध व तलुका दुसाध के परिजनों को दी थी। जिनके नाम से उसकी रशीद वर्ष 2002 तक कटी है। उन लोगों ने अब वह जमीन हमें बेच दी है। इस सिलसिले में बुधवार को मिथिलेश सिंह ने भी पत्र जारी कर मीडिया से सच उजागर करने का दावा किया है। उनके अनुसार वह जमीन डुमरांव राज परिवार ने रामदहिन उपाध्याय को दी थी। आजादी के बाद 1962 में बने रजिस्टर टू में भी वह जमीन उनके नाम से दर्ज है। उसी परिवार ने हमें वह जमीन बेची है। पंकज के साथ जितेन्द्र उर्फ गगन सिंह ने मिलकर यह चाल चली है। वे गलत तरीके से विवाद खड़ा कर रहे हैं। कुछ दिनों पहले इन लोगों ने गडऩी गांव में संतोष दुबे की जमीन हड़पनी चाही थी। जहां गोली भी चली। जिसमें गगन घायल भी हुआ। बावजूद इसके यह दोनों वही धंधा अपनाए हुए हैं। बहरहाल इन नेताओं के बीच जंग जारी है।