छह दिवसीय धार्मिक महोत्सव के अंतिम दिन धर्मगुरुओं ने युवाओं से संस्कृति से जुड़े रहने का किया आह्वान बक्सर खबर। जिले के ऐतिहासिक अहिरौली मठ वरदराज आश्रम में पुरुषोत्तम मास के अवसर पर आयोजित छह दिवसीय श्री लक्ष्मीनारायण यज्ञ रविवार को वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ सम्पन्न हो गया। यज्ञ की पूर्णाहुति के अवसर पर आयोजित विशाल संत सम्मेलन एवं विद्वत्सभा में देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे संतों और विद्वानों ने सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति तथा मानव कल्याण पर अपने विचार व्यक्त किए।अहिरौली मठ के मठाधीश श्रीमधुसूदनाचार्य जी महाराज के सानिध्य में 26 मई से चल रहे इस धार्मिक महोत्सव में प्रतिदिन यज्ञ, श्रीमद्भागवत कथा, श्रीराम कथा और प्रवचन का आयोजन किया गया। समापन दिवस पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति देकर सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की। संत सम्मेलन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक श्रेष्ठ व्यवस्था है। उन्होंने समाज में नैतिक मूल्यों, संस्कारों और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार पर बल दिया। संतों ने युवाओं से भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहने का आह्वान किया।
सम्मेलन में काशी के विद्वान डॉ. संजय कुमार चौबे, डॉ. अंबरीश कुमार मिश्र, डॉ. शेषमणि शुक्ल, डॉ. जितेंद्र तिवारी, राकेश रंजन उपाध्याय, मनीष पांडेय और मनीष मिश्र सहित कई विद्वानों ने भाग लिया। सभी ने धार्मिक आयोजनों को समाज में सकारात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक चेतना का माध्यम बताया। समापन समारोह के दौरान मठ परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा। दूर-दराज से पहुंचे भक्तों ने कथा, प्रवचन और यज्ञ का लाभ उठाया। आयोजन के सफल संचालन में मठ से जुड़े संतों, शिष्यों और स्थानीय श्रद्धालुओं की सक्रिय भूमिका रही। यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद संतों ने विश्व शांति, मानव कल्याण और समाज में सद्भावना की प्रार्थना की। धार्मिक अनुष्ठानों के समापन के साथ छह दिनों से चल रहा यह आध्यात्मिक महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में सम्पन्न हो गया।































































































