घोड़ों-ऊंटों के काफिले और रथों ने खींचा ध्यान, राजकुमार चौबे बोले- धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए समाज को एकजुट होना होगा बक्सर खबर। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर सारिमपुर-अहिरौली स्थित मां गंगा के अहिल्या तट पर मंगलवार को श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का भव्य शुभारंभ कलश शोभायात्रा के साथ हुआ। धार्मिक आस्था, वैदिक मंत्रोच्चार और भक्ति संगीत से पूरा इलाका भक्तिमय हो उठा। शोभायात्रा में सबसे आगे दर्जनों घोड़े और ऊंटों का काफिला चल रहा था। ऊंट और घोड़ों पर सवार श्रद्धालु हाथों में सनातन धर्म का ध्वज लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए थे। उनके पीछे बैंड-बाजे की धुन पर हजारों की संख्या में माताएं, बहनें और श्रद्धालु सिर पर कलश लेकर शामिल हुए। शोभायात्रा में शामिल दो भव्य रथ लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे। पहले रथ पर वरदराज मंदिर के पीठाधीश्वर एवं कई संत-महात्मा विराजमान थे। वहीं दूसरे रथ पर विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय संयोजक राजकुमार चौबे साधु-संतों के साथ सवार होकर श्रद्धालुओं का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे। यात्रा मार्ग में जगह-जगह पुष्पवर्षा और स्वागत किया गया।
कलश यात्रा अहिरौली मठिया से निकलकर गांव का भ्रमण करते हुए नेशनल हाईवे पहुंची। वहां से गोलंबर, सिंडिकेट, बुधनपुरवा, छोटकी सरीमपुर और बड़की सरीमपुर होते हुए पुनः अहिरौली पहुंचकर यात्रा का समापन हुआ। इस दौरान विश्वामित्र सेना के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। संगठन के युवाओं ने शोभायात्रा की व्यवस्था संभालने के साथ श्रद्धालुओं की सेवा में सक्रिय भूमिका निभाई। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए पेयजल और स्वागत की व्यवस्था भी की गई। राजकुमार चौबे ने कहा कि सनातन संस्कृति और वैदिक परंपराएं भारत की आत्मा हैं। मां गंगा के पावन तट पर आयोजित यह महायज्ञ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन चेतना के जागरण का अभियान है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि समाज धर्म, संस्कृति और संस्कारों की रक्षा के लिए संगठित होकर आगे आए।

उन्होंने कहा कि विश्वामित्र सेना सदैव सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और सामाजिक समरसता के संरक्षण के लिए कार्य करती रहेगी। ऐसे धार्मिक आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और संस्कृति से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है। महायज्ञ का आयोजन भगवान श्रीवरदराज की कृपा तथा परम पूज्य श्री श्री 1008 स्वामी वेंकटाचार्य महाराज के पावन संकल्प से किया जा रहा है। कार्यक्रम महंत श्री श्री 108 स्वामी मधुसूदनाचार्य जी महाराज के सान्निध्य में संपन्न हो रहा है। यह महायज्ञ 26 मई से प्रारंभ होकर 31 मई को पूर्णाहुति एवं विशाल भंडारे के साथ संपन्न होगा। आयोजन के दौरान प्रतिदिन श्रीमद्भागवत कथा, पूजन, यज्ञ और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे।































































































