अधर्म के विनाश और प्रेम-भक्ति की स्थापना का संदेश देती है श्रीमद्भागवत कथा: पीताम्बर जी बक्सर खबर। शहर के बाईपास रोड स्थित बस स्टैंड के समीप आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन बुधवार को भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन सुन श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो उठे। कथा व्यास प्रेमाचार्य पीताम्बर जी महाराज ने श्रीकृष्ण जन्म की दिव्य कथा का वर्णन करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण जन्मोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ज्ञान, सामाजिक जीवन और धार्मिक-सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण स्वयं परमात्मा स्वरूप होते हुए भी अपने माता-पिता के चरण स्पर्श करने में कभी संकोच नहीं करते थे। उनके जीवन से मनुष्य को संस्कार, विनम्रता और कर्तव्य पालन की प्रेरणा मिलती है। कथा के दौरान उन्होंने धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अत्याचार, दुराचार और पापाचार बढ़ा है, तब-तब भगवान ने अवतार लेकर धर्म की स्थापना की है।
प्रेमाचार्य जी ने कहा कि मथुरा के अत्याचारी राजा कंस के पापों से जब धरती त्राहिमाम करने लगी, तब भगवान विष्णु ने देवकी के अष्टम पुत्र के रूप में श्रीकृष्ण का अवतार लिया। वहीं त्रेता युग में रावण के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान श्रीराम ने जन्म लिया। इन प्रसंगों को सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कथा व्यास ने श्रीकृष्ण की माखन चोरी की लीला का आध्यात्मिक अर्थ समझाते हुए कहा कि प्रभु ने केवल माखन अर्थात सार तत्व को ग्रहण किया और असार को त्याग दिया। इससे मनुष्य को यह सीख मिलती है कि संसार के नश्वर भोग-विलास में समय और सामर्थ्य व्यर्थ करने के बजाय परमात्मा की प्राप्ति को जीवन का लक्ष्य बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण केवल ग्वाल-बालों के सखा नहीं, बल्कि जगद्गुरु थे। उन्होंने लोगों की आत्मा का जागरण कर उन्हें सुंदर और आध्यात्मिक जीवन जीने का मार्ग दिखाया। श्रीमद्भागवत कथा का कृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग अधर्म के नाश, भक्ति की स्थापना तथा प्रेम और आनंद के संदेश का प्रतीक है।
कथा के दौरान नंदोत्सव प्रसंग का भी जीवंत वर्णन किया गया, जिसे सुन श्रद्धालु झूम उठे। कथा में बताया गया कि भगवान सच्चे भक्तों की पुकार सुनकर किसी भी परिस्थिति में प्रकट हो सकते हैं। यह प्रसंग अहंकार के नाश और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का संदेश देता है। इस अवसर पर मुख्य यजमान आशुतोष मिश्रा, रेणु मिश्रा, आदित्य कुमार मिश्रा, अतुल कुमार मिश्रा, डॉ. मनोज पांडेय, संजय पांडेय, ग्रीस मिश्रा, नागेश पांडेय सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

































































































