पुण्यतिथि पर विशेष : अटल जी को बहुत पसंद थी बक्सर की लिट्टी

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बक्सर खबर। अटल तुम बहुत याद आते हो। 16 अगस्त 2018 को नियति ने हमारे बीच से कवि ह्रदय प्रधानमंत्री को अपने पास बुला लिया। वह एक शीतल छाया थे जिनके विराट व्यक्तित्व के आगे सारा विपक्ष नतमस्तक हो जाता था। जिनके ठहाकों से पूरा संसद गूंज जाता। जी हां हम बात कर रहे हैं भारत वर्ष के भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी बाजपेयी की। सहज ,सरल और निर्मल व्यक्तित्व के धनी वाजपेयी के जीवन पर राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का प्रबल प्रभाव था। उन्होंने प्रचारक की भूमिका में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में अपना योगदान दिया एवं जीवन के अंतिम क्षण तक संघ के एक समर्पित कार्यकर्ता बने रहे।

उनका बचपन से ही साहित्य की तरफ रूझान था। यह इनको विरासत में मिला था। वे जब बक्सर आते थे। यहां की लिट्टी मांगकर खाते थे। उनको जानने वाले जन संघ के पूर्व नेता बबन उपाध्याय बताते हैं। 75 के कार्यक्रम में ब्रह्मपुर के एक कार्यक्रम में आए। तो उन्होंने कहो लिट्टी ना मिली। जब लोग हम कभी दिल्ली जाते। तो वहां भी बक्सर की लिट्टी चर्चा होती थी। उन्हें बक्सर से बहुत लगाव था। प्रधानमंत्री बनने से पूर्व एवं उसके बाद भी। बक्सर से ही अपनी सभा का श्रीगणेश करते थे।

युवा अवस्था में अटल जी की फाइल फोटो

अटल जी का जीवन
बक्सर खबर। इनके पिता कृष्ण बिहारी बाजपेयी एक शिक्षक के साथ कवि भी थे। अटल बिहारी बाजपेयी किशोरावस्था में ही अपनी प्रसिद्ध कविता हिन्दू तन मन, हिन्दू जीवन रग रग हिन्दू मेरा परिचय जैसे जोशपूर्ण कविता को लिख अपनी राष्ट्रभक्ति दिखाई। कवि होने के साथ ही वह एक निर्भीक पत्रकार भी थे। इन्होंने राष्ट्रधर्म, पाञ्चजन्य एवं अन्य पत्र पत्रिकाओं का संपादन भी किया। स्व अटल बिहारी बाजपेयी एक कुशल राजनीतिज्ञ भी थे। जब 1977 में गैर कांग्रेसी सरकार आई तो उन्हें विदेश मंत्रालय का प्रभार मिला। सन् 1996 एवं 1998 में दो बार भारत के प्रधानमंत्री बने। उनका कार्यकाल अविस्मरणीय रहा। उन्होंने जय जवान, जय किसान और जय विज्ञान का नारा दिया। जो अपने आप में राजनीतिक श्रेष्ठता का उदाहरण है। स्व. अटल बिहारी बाजपेयी को बक्सर बखर आज के दिन भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए अपने विचारवान पाठकों से कहता है कि स्व.अटलबिहारी बाजपेयी को समझना है तो उनकी कविता संग्रह इक्यावन कविताओं को जरुर पढ़े और सुने। जिसे स्व. जगजीत सिंह ने अपने स्वर मे गाया है।

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