सुलह-समझौते से 2.24 करोड़ रुपये से अधिक के मामलों का हुआ निष्पादन बक्सर खबर। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में शनिवार को इस वर्ष की द्वितीय राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत में कुल 736 मामलों का सुलह-समझौते के आधार पर निपटारा किया गया। विभिन्न मामलों में कुल 2 करोड़ 24 लाख 60 हजार 572 रुपये की समझौता राशि पर सहमति बनी। वादों के निष्पादन के लिए कुल 14 बेंचों का गठन किया गया था। कार्यक्रम का उद्घाटन पटना उच्च न्यायालय की निरीक्षी न्यायाधीश सोनी श्रीवास्तव, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार अध्यक्ष काजल झांब, जिलाधिकारी साहिला, पुलिस अधीक्षक शुभम आर्य, जिला अधिवक्ता संघ अध्यक्ष बबन ओझा, प्रथम प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय मनोज कुमार, अवर न्यायाधीश सह सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकार नेहा दयाल, स्थायी लोक अदालत अध्यक्ष प्रवीण कुमार सिंह श्रीनेत और मुख्य अधिवक्ता विधिक सहायता प्रतिरक्षा प्रणाली विनय कुमार सिन्हा समेत अन्य अधिकारियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान निरीक्षी न्यायाधीश ने दिव्यांग बच्चों के बीच ट्राई साइकिल, स्कूल बैग और अन्य उपहार वितरित किए। अपने संबोधन में सोनी श्रीवास्तव ने कहा कि लोक अदालत सुलभ और त्वरित न्याय का प्रभावी माध्यम है। इसमें किसी की हार या जीत नहीं होती, बल्कि दोनों पक्षों की सहमति से विवादों का समाधान होता है।
उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक मामलों का निपटारा लोक अदालत के माध्यम से कराने की अपील की। जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देश पर राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाता है, ताकि न्यायालयों पर बढ़ते मुकदमों के बोझ को कम किया जा सके और लोगों को सस्ता व त्वरित न्याय मिल सके।लोक अदालत में बैंक से जुड़े 294 मामलों का निपटारा किया गया, जिसमें 1 करोड़ 99 लाख 30 हजार 791 रुपये की समझौता राशि पर हस्ताक्षर हुए। इसके अलावा यातायात के 160, आपराधिक 120, विद्युत के 143 तथा वैवाहिक मामलों के 19 मुकदमों का निष्पादन किया गया। मौके पर जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश उदय प्रताप सिंह, सुदेश कुमार श्रीवास्तव, संजीत कुमार सिंह, अमित कुमार शर्मा, सोनेलाल रजक, कमल कुमार, मानस कुमार वत्सल, अनुपमा सिंह, भोला सिंह, महेश्वर नाथ पांडेय तथा न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी मान्वेंद्र सिंह समेत कई न्यायिक पदाधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा पैनल अधिवक्ताओं, पारा विधिक स्वयंसेवकों और व्यवहार न्यायालय के कर्मचारियों की भी सक्रिय भागीदारी रही।


































































































