महासंघ के आह्वान पर दूसरे दिन भी डटे रहे कर्मी, वेतन कटौती और पदनाम को लेकर जताया विरोध बक्सर खबर। शहर स्थित महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय में शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की 15 सूत्री लंबित मांगों को लेकर चल रही कलमबंद हड़ताल गुरुवार को दूसरे दिन भी जारी रही। बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ, पटना तथा वीर कुंवर सिंह प्रक्षेत्र, आरा के आह्वान पर कर्मचारी महाविद्यालय परिसर में धरना पर बैठे रहे। धरना को महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डॉ. कृष्ण कांत सिंह ने भी समर्थन दिया। उन्होंने कर्मचारियों के आंदोलन को जायज बताते हुए उनके साथ धरना स्थल पर बैठकर एकजुटता दिखाई। वहीं शिक्षक संघ के सचिव प्रो. योगर्षि राजपूत ने भी कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाते हुए राज्य सरकार से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं का सम्मानजनक समाधान आवश्यक है। धरना के दौरान महाविद्यालय के डॉ. अवनीश कुमार, डॉ. अरविंद वर्मा, डॉ. पंकज चौधरी, डॉ. महेंद्र सिंह, डॉ. राकेश कुमार तिवारी, डॉ. अमृता एवं डॉ. छाया समेत कई शिक्षकों ने कर्मचारियों की मांगों को न्यायोचित बताया।
शिक्षकों ने आरोप लगाया कि उच्चतम न्यायालय के आदेशों के बावजूद राज्य सरकार विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मियों के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार कर रही है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सहायक पद को लिपिकीय वर्ग में शामिल कर दिया गया है, जबकि प्रधान सहायक एवं लेखापाल को प्रशाखा पदाधिकारी का पदनाम और वेतनमान नहीं दिया जा रहा है। साथ ही सहायक एवं पुस्तकालयाध्यक्ष को यूजीसी वेतनमान से वंचित रखा गया है। पीवीसी कर्मियों के वेतन में कटौती, आउटसोर्स एवं संविदा कर्मियों की सेवा नियमित करने तथा विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की नियमित नियुक्ति शीघ्र शुरू करने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई। धरना में डॉ. अमित मिश्रा, अध्यक्ष टुनटुन मिश्र, चिन्मय प्रकाश झा, राजीव रंजन कुमार सिंह, हरगोविंद सिंह, सरिता कुमारी, अनिल कुमार, सुनील कुमार, मुन्नी देवी, शांति देवी, शिवम भारद्वाज और अभय कुमार मिश्रा सहित कई कर्मचारी उपस्थित रहे। वहीं महाविद्यालय के कार्यवाहक बड़ा बाबू विनायकदत्त पाठक, जो शीघ्र ही सेवानिवृत्त होने वाले हैं, ने भी आंदोलन को नैतिक समर्थन देते हुए सरकार से कर्मचारियों की मांगों को अविलंब पूरा करने की मांग की।

































































































