एमवी कॉलेज में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ बक्सर खबर। स्थानीय महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय के मानस सभागार में मंगलवार को “भारतीय ज्ञान परंपरा में मानवता एक अनंत यात्रा” विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलन एवं महर्षि विश्वामित्र की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रो. डॉ. कृष्ण कांत सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि मानवीय जीवन पद्धति है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली आधुनिक विज्ञान को भी मानवीय आधार प्रदान करती है। मुख्य वक्ता वाराणसी के प्रो. रमेश चंद्र नेगी ने भारतीय एवं बौद्ध दर्शन के समन्वय पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि करुणा और प्रज्ञा भारतीय ज्ञान के मूल तत्व हैं, जो व्यक्ति को वैश्विक नागरिक बनाने की क्षमता रखते हैं।
वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. प्रकाश राय ने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ को भारतीय ज्ञान का सर्वोच्च मानवीय मूल्य बताया। वहीं शिक्षा संकायाध्यक्ष प्रो. रविकांत ने नई शिक्षा नीति के संदर्भ में प्राचीन शिक्षण पद्धतियों के महत्व पर बल दिया। अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. वाचस्पति द्विवेदी ने ‘स्पिरिचुअल ह्यूमैनिटीज’ विषय पर चर्चा करते हुए भारतीय दर्शन के वैश्विक प्रभाव को रेखांकित किया। भोजनावकाश के बाद आयोजित तकनीकी सत्र में जेपी विश्वविद्यालय, छपरा के प्रो. उदय शंकर ओझा ने लोक ज्ञान और मौखिक परंपराओं को मानवता की वास्तविक धरोहर बताया। इस दौरान विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए 40 शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन सह-संयोजक डॉ. प्रीति मौर्या ने किया। मुख्य वक्ताओं का परिचय डॉ. ओम प्रकाश आर्य ने कराया। संगोष्ठी की रूपरेखा संयोजक एवं अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रियेश रंजन ने प्रस्तुत की। अंत में आयोजन सचिव डॉ. रवि प्रभात ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
संगोष्ठी में प्रो. संजय कुमार त्रिपाठी, प्रो. सुभाष चंद्र पाठक, डॉ. श्याम जी मिश्रा, डॉ. मोहन लाल श्रीवास्तव, डॉ. प्रदीप कुमार तिवारी, डॉ. कृष्णा अली अल्बर्ट, डॉ. विजय राज कुमावत, डॉ. आनंद भूषण पांडेय, डॉ. सतेन्द्र कुमार पाण्डेय, डॉ. अंकिता मिश्रा, डॉ. वंदना कुमारी, डॉ. स्मृति चौधरी एवं डॉ. टीएन पांडेय समेत बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। संगोष्ठी का दूसरा दिन 13 मई को आयोजित होगा। इसमें विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शैलेन्द्र कुमार चतुर्वेदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। महाविद्यालय के संकलित ग्रंथों का विमोचन भी किया जाएगा। वहीं तोलाराम ग्रुप के प्रतिनिधि ऑनलाइन माध्यम से विशेष अतिथि के रूप में जुड़ेंगे।


































































































