बक्सर खबर ( गुरू गरम है)। भारत भूषण का बलिदान जाया नहीं जाएगा। यह शब्द आज सबकी जबान पर है। लेकिन, यह तभी संभव है, जब हर कोई भ्रष्टाचार का विरोध करे। और इसकी शुरुआत घर से होनी चाहिए। क्योंकि हमारे और आपके बीच से ही निकलकर उस कुर्सी पर कोई जाता है। ऐसा नहीं सरकार में बैठे नेता का बेटा हर जिले का कलेक्टर है। बात आप समक्ष सकते हैं, जाति और संप्रदाय का जहर घोलने की बात आप घर में करेंगे। और नैतिकता को घर से गायब होने वाले ताखे पर रख देंगे। तो भविष्य ऐसा ही होगा। जिसका भयावह चेहरा अभी आप देख रहे हैं। यह बातें सोचकर गुरु का माथा गरम है। एक शब्द 2026 के प्रारंभ से ही प्रचलन में है। लेकिन, अब वह जेहन में सीधे बैठ गया है। काले अंग्रेज, यह विशेषण उन लोगों के लिए है। जो समाज सेवा की प्रेरणा भरी बातें कहकर कुर्सी पर काबिज होते हैं।
और मैले कुचैले कपड़े वालों की बात कौन कहे। अपने से नीचे की कुर्सी वालों को भी हिकारत की नजर से देखते हैं। सच के लिए लड़ने वाला तो उन्हें पाखंड का पर्याय लगता है। क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में सच्चाई का साथ कभी दिया ही नहीं। जो आजकल चल रहा है। वह यह बताने के लिए काफी है। समाज को बांटने वाले कितने सक्रिय हैं। सोशल मीडिया पर इंसाफ की वकालत जितनी नहीं हो रही है। उससे कहीं ज्यादा कुछ लोग जहर भी उगल रहे हैं। उन्हें इस बात से मतलब नहीं, भ्रष्टाचार मिटाना चाहिए। अगर ऐसा होता तो अचंल अधिकारी जैसे सामान्य पद पर बैठने वाले अधिकारी लोगों से रिश्वत मांगता भला। दो दिन पहले एक व्यक्ति ने राजपुर इलाके से फोन किया। रात के ग्यारह बज रहे थे। उसने कहा दाखिल खारिज का मेरा आवेदन दसवीं बार अस्वीकृत हुआ है। मैसेज अभी रात के ग्यारह बजे आया है।
बताइए इतनी रात में कौन दफ्तर खुलता है। यह सवाल अभी भी जेहन में उठ रहा है। क्या कुर्सी पर बैठे ऐसे अधिकारियों के लिए काले अंग्रेज शब्द काफी है। ऐसे लोग देश को पीछे धकेल रहे हैं। और सोशल मीडिया में कब्जा जमाने वाले कुछ मदारी खुद को पत्रकार बता कर मीडिया को बदनाम कर रहे हैं। इस विषय पर भी एक सज्जन से गुरु की बात हो रही थी। उन्होंने कहा, आप में और उनमें क्या अंतर है, वे आपसे कम नहीं। उन्हें कौन समक्षाए पुरानी कहावत है। किसी के चेहरे पर चोर नहीं लिखा होता, उसकी हकीकत ही चोर और सज्जन का भेद अलग करती है। उसकी भाषा और बोली ही कौवे और कोयल का भेद स्पष्ट करती है। लेकिन, बदलते सामाजिक परिवेश को बचाना, भ्रष्टाचार का विरोध करना और समाज हित की बात करना ही पत्रकारिता ही नहीं समाज के हर व्यक्ति का धर्म और कर्तव्य है जो देश की प्रगति चाहता है। (माउथ मीडिया बक्सर खबर का साप्ताहिक कॉलम है। जो प्रत्येक शनिवार को प्रकाशित होता है। इसमें हम समाज की कड़वी सच्चाई और मौजूदा हालात का उल्लेख करते हैं। जो सामान्य रुप में खबर के तौर पर नहीं लिखी जा सकती। )































































































