लुप्त होती विरासत को बचाने आगे आए 12 से 20 साल के युवा, 5 हजार लकड़ी के चम्मच और स्टिक से संवर रही 10 फीट ऊंची ताजिया बक्सर खबर। मोहर्रम के अवसर पर शहर में ताजियों और अखाड़ों की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इसी कड़ी में उत्तरी चौमुहानी ठठेरी बाजार स्थित सरताज कमेटी एक बार फिर अपनी पुरानी पहचान को जीवंत करने में जुटी है। करीब 25 वर्षों बाद कमेटी के युवा सदस्य भव्य और आकर्षक ताजिया का निर्माण कर रहे हैं। शहर की पुरानी और प्रतिष्ठित ताजिया कमेटियों में शुमार सरताज कमेटी का नाम कभी अदब और एहतराम के साथ लिया जाता था। एक दौर ऐसा भी था जब कमेटी की ताजिया लगातार कई वर्षों तक प्रथम स्थान प्राप्त कर सुर्खियों में रही। घास, भारतीय सिक्कों और पवित्र कुरआनी आयतों की कलात्मक सजावट वाली ताजियां उस समय लोगों के आकर्षण का केंद्र बनती थीं। पिछले कई वर्षों से तुलसी भवन स्थित इमामबाड़े में सांकेतिक रूप से छोटी ताजिया रखकर धार्मिक रस्में अदा की जाती रही हैं। लेकिन इस वर्ष मोहल्ले के बच्चों और युवाओं ने अपने गौरवशाली इतिहास को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया है।
कमेटी के अध्यक्ष आसिफ इकबाल ने बताया कि बचपन से उन्होंने सरताज कमेटी की शानदार ताजियों के किस्से सुने थे। इसी प्रेरणा से 12 से 20 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं ने भव्य ताजिया निर्माण का बीड़ा उठाया है। ताजिया बनाने का पूर्व अनुभव नहीं होने के कारण युवाओं ने एआई तकनीक का सहारा लिया। एआई की मदद से डिजाइन, आकार, निर्माण प्रक्रिया और आवश्यक सामग्री की जानकारी जुटाकर ताजिया तैयार की जा रही है। ताजिया निर्माण में ताल्हा अफराज, सनी इकबाल, सत्यम गुप्ता, शिवम वर्मा समेत कई युवा श्रमदान कर रहे हैं। करीब 10 फीट ऊंची और 3 फीट चौड़ी इस ताजिया के निर्माण में लगभग 5 हजार वुडन चम्मच और स्टिक का उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा बारीक और कलात्मक कारीगरी भी की जा रही है।
युवाओं का कहना है कि ताजिया निर्माण की पुरानी कला धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है। पहले इस काम से जुड़े लोग रोजी-रोटी की तलाश में बाहर चले गए, जबकि कुछ बुजुर्ग हो चुके हैं। ऐसे में नई पीढ़ी ने इस विरासत को सहेजने का जिम्मा उठाया है। उन्हें उम्मीद है कि इस वर्ष सरताज कमेटी की ताजिया शहर में आकर्षण और चर्चा का प्रमुख केंद्र बनेगी।






























































































