धन-पद के मोह में धर्म से दूर हो रहा इंसान, सामाजिक मूल्यों का हो रहा ह्रास बक्सर खबर। सर्वजन कल्याण सेवा समिति सिद्धाश्रम धाम की ओर से रामरेखा घाट स्थित रामेश्वर नाथ मंदिर परिसर में आयोजित 18वें धर्म आयोजन के सातवें दिन रविवार को श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन हुआ। कथा वाचन करते हुए आचार्य कृष्णानंद शास्त्री पौराणिक जी ने सनातन धर्म, भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और मानवीय मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें ईश्वर समय-समय पर अवतार लेकर धर्म की रक्षा करते हैं। भगवान के विभिन्न अवतार केवल दुष्टों के विनाश के लिए नहीं, बल्कि मानवता और नैतिक मूल्यों की स्थापना के लिए भी होते हैं।
पौराणिक जी ने कहा कि भगवान राम के अवतार से पहले रावण और भगवान कृष्ण के अवतार से पूर्व कंस का अत्याचार चरम पर था। उस समय समाज में माता-पिता, गुरु और अतिथि के सम्मान का अभाव हो गया था। यही राक्षसी प्रवृत्ति का लक्षण है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवनकाल में गोकुल, वृंदावन, मथुरा और द्वारका में विभिन्न लीलाओं के माध्यम से धर्म और भक्ति का संदेश दिया। श्रीकृष्ण लीला पुरुषोत्तम के रूप में और भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में मानव समाज का मार्गदर्शन करते रहे। उन्होंने कहा कि यदि कभी धर्म और परिवार में से किसी एक का चयन करना पड़े तो धर्म को प्राथमिकता देनी चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण और भगवान राम दोनों ने अपने जीवन से यही संदेश दिया है।
उन्होंने वर्तमान समाज पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज मनुष्य धन, पद और प्रतिष्ठा के मोह में धर्म से दूर होता जा रहा है। इसके कारण सामाजिक और नैतिक मूल्यों का ह्रास हो रहा है। आचार्य कृष्णानंद शास्त्री ने कहा कि भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में फैली कुरीतियों और बुराइयों को दूर करने का प्रभावी माध्यम है। यदि इसके संदेशों को जीवन में उतारा जाए तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।































































































