26 हजार वेतन और 65 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु की मांग, बकाया भुगतान न होने पर जताई नाराजगी बक्सर खबर। आशा एवं आशा फैसिलिटेटर संघ की राज्य शाखा के आह्वान पर सोमवार को जिले में शिष्टमंडल के माध्यम से 23 सूत्री मांग पत्र सिविल सर्जन को सौंपा गया। यह मांग पत्र कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति पटना के नाम संबोधित था। आचार संहिता को देखते हुए प्रदर्शन की जगह शिष्टमंडल के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। शिष्टमंडल का नेतृत्व जिला संयोजक सह राज्य उपाध्यक्ष अरुण कुमार ओझा ने किया। संघ ने कहा कि आशा और आशा फैसिलिटेटर को पिछले 7 से 8 माह से प्रोत्साहन एवं पारितोषिक राशि का भुगतान नहीं मिला है। इससे आर्थिक संकट की स्थिति बनी हुई है।
मांग पत्र में प्रत्येक माह के प्रथम सप्ताह में प्रोत्साहन राशि और पारितोषिक राशि का नियमित भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की गई। साथ ही आवंटन वितरण में अनियमितता दूर करने पर जोर दिया गया। संघ ने कहा कि कई प्रखंडों में दिसंबर तक की राशि मिल चुकी है, जबकि कुछ प्रखंडों में एक माह का भुगतान भी लंबित है। आशा फैसिलिटेटर को पूरे माह कार्य कराने के बावजूद केवल 21 दिनों का यात्रा भत्ता दिए जाने पर भी नाराजगी जताई गई। इसे बढ़ाकर 30 दिनों का करने की मांग उठाई गई। संघ ने आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका की तर्ज पर आशा कार्यकर्ताओं की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने की मांग की। साथ ही आशा के कार्य क्षेत्र में जीविका दीदियों को भेजने की व्यवस्था पर रोक लगाने की भी मांग की गई।
ज्ञापन में लोकसभा और विधानसभा चुनाव में ड्यूटी करने वाली आशा एवं आशा फैसिलिटेटर का बकाया भुगतान कराने की मांग भी शामिल रही। संघ ने आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को 10 लाख रुपये रिटायरमेंट बेनिफिट और 10 हजार रुपये मासिक पेंशन देने की मांग उठाई। इसके अलावा मुख्यमंत्री द्वारा घोषित दो हजार रुपये पारितोषिक राशि सीधे खाते में भेजने तथा प्रोत्साहन राशि के स्थान पर 26 हजार रुपये मासिक वेतन लागू करने की मांग की गई। शिष्टमंडल में डैजी देवी, नीतू पांडेय, सरस्वती देवी, बेबी देवी, ममता, धर्मशिला, रिंकी, महावीर पंडित और हरेराम सिंह शामिल रहे।


































































































