मॉडल दलहन ग्राम योजना के तहत 40 हेक्टेयर में किया गया प्रदर्शन बक्सर खबर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, पूर्वी क्षेत्र के तत्वावधान में मंगलवार को सिमरी प्रखंड के नियाजीपुर गांव में मसूर फसल की वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भारत सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना भारत में दालों की आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए आदर्श दलहन ग्राम दृष्टिकोण के अंतर्गत मॉडल दलहन ग्राम योजना के तहत आयोजित हुआ। जिले के दियारा क्षेत्र के नियाजिपुर और बड़का राजपुर में बड़े पैमाने पर मसूर की खेती होती है, लेकिन अधिक बीज दर, छिटकवा बुवाई, बीज शोधन की कमी तथा पोषक तत्वों के समुचित प्रबंधन की जानकारी के अभाव में किसानों को अपेक्षित उपज नहीं मिल पाती है। इसी समस्या के समाधान के लिए नियाजिपुर में करीब 40 हेक्टेयर क्षेत्रफल में वैज्ञानिक विधि से मसूर की खेती का प्रदर्शन किया गया।
प्रक्षेत्र दिवस के दौरान किसानों को संस्तुत बीज दर, 16 किलोग्राम प्रति एकड़, बीज शोधन, पंक्ति में बुवाई, समेकित कीट प्रबंधन तथा पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि इन तकनीकों को अपनाकर उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। डॉ. रामकेवल ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि मसूर बिहार की एक महत्वपूर्ण दलहन फसल है, जिसका उपयोग दाल के साथ-साथ नमकीन उत्पादों में भी होता है। उन्होंने बताया कि मसूर के साथ मटर, चना, तीसी और खेसारी जैसी फसलों की अक्टूबर माह में पंक्ति विधि से बुवाई करने पर अधिक उपज मिलती है और रोग-व्याधियों का प्रकोप भी कम होता है। इस अवसर पर कृषि समन्वयक रामपुकार तिवारी सहित क्षेत्र के कई प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे। कार्यक्रम में नियाजिपुर के भुनेश्वर यादव, मोहन यादव, राजेश यादव, शिवजी यादव, रितेश यादव, ओमशंकर यादव, रमण यादव, रामनाथ ठाकुर, छोटक गौंड, रीमा देवी, बिजंती देवी समेत कुल 104 किसानों ने भाग लेकर आधुनिक खेती की तकनीकों की जानकारी हासिल की।


































































































