22 साल पुराने आर्म्स एक्ट मामले में फैसला, दोषी को तीन साल की जेल

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चेकिंग के दौरान देशी बंदूक और पिस्तौल के साथ पकड़े गए आरोपी पर 20 हजार का जुर्माना                        बक्सर खबर। अदालत ने कानून के शिकंजे से बचने की कोशिश कर रहे एक अपराधी को दो दशक से भी अधिक समय बाद सजा सुनाई है। अनुमंडलीय न्यायिक पदाधिकारी रंजना दुबे की अदालत ने आर्म्स एक्ट के एक पुराने मामले में सुनवाई करते हुए आरोपी को दोषी करार दिया और उसे तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही, अदालत ने दोषी पर कुल 20 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया है। अभियोजन पदाधिकारी राकेश कुमार राय ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि यह मामला 5 जून 2004 का है। उस समय सिकरौल थाना पुलिस द्वारा सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान पुलिस ने विजय शंकर पांडेय, पिता- सुखदेव पांडेय को संदिग्ध अवस्था में पकड़ा था।

जब आरोपी की तलाशी ली गई, तो उसके पास से एक देशी बंदूक, एक पिस्तौल और जिंदा कारतूस बरामद हुए थे। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आर्म्स एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। लंबे समय तक चली सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए गवाहों और साक्ष्यों को बारीकी से परखा। साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दो अलग-अलग मामलों में दोषी पाया। दोनों मामलों में तीन-तीन वर्ष की जेल और दोनों मामलों में 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माना न भरने की स्थिति में दोषी को एक माह की अतिरिक्त जेल काटनी होगी। अदालत ने स्पष्ट किया है कि आरोपी की दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी।

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