पॉक्सो केस में कोर्ट सख्त: नौ साल पुराने मामले में शिक्षा विभाग की सुस्ती पर जताई कड़ी नाराजगी

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डीईओ को 27 जून को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश, पीड़िता की उम्र सत्यापन के लिए स्कूल की नामांकन पंजी न लाने पर भड़का न्यायालय                                                                        बक्सर खबर। विशेष पॉक्सो न्यायाधीश अमित कुमार शर्मा की अदालत ने नौ वर्ष पुराने लंबित पॉक्सो मामले की सुनवाई के दौरान जिला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने डीईओ को 27 जून को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। राजपुर थाना कांड संख्या 244/2017 से संबंधित मामले में शुक्रवार को सुनवाई हुई। अदालत में पीड़िता की आयु सत्यापन के लिए प्राथमिक विद्यालय हथुआ के नामांकन पंजी की आवश्यकता बताई गई। इसके लिए पूर्व में कई बार पत्र, समन और कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, लेकिन विद्यालय के प्रधानाध्यापक अदालत में उपस्थित नहीं हुए।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कहा कि मामला लगभग नौ वर्ष पुराना हो चुका है और अब भी अभियोजन साक्ष्य के चरण में लंबित है। गवाह के उपस्थित नहीं होने के कारण अभियोजन साक्ष्य बंद करने की मांग की गई। अदालत ने पाया कि कई मामलों में विद्यालयों के प्रधानाध्यापक यह कहते हैं कि उन्हें न्यायालय की ओर से भेजी गई सूचना की जानकारी ही नहीं मिली। इसे गंभीर मानते हुए न्यायालय ने डीईओ को व्यवस्था में सुधार के लिए कई निर्देश जारी किए। कोर्ट ने कहा कि न्यायालय से भेजे गए पत्र और समन की तामिला की जानकारी डीईओ कार्यालय नियमित रूप से उपलब्ध कराए। संबंधित प्रधानाध्यापक का मोबाइल नंबर भी न्यायालय को उपलब्ध कराया जाए ताकि कार्यवाही में तेजी लाई जा सके।

न्यायालय ने डीईओ को अगली तिथि पर संबंधित प्रधानाध्यापक की उपस्थिति सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है। साथ ही प्रक्रिया में सुधार के उपायों पर चर्चा के लिए डीईओ को 27 जून को अदालत में उपस्थित होने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई को अभियोजन साक्ष्य के लिए निर्धारित की गई है।

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