जहां कभी बंदूकें बोई गईं, वहीं अब प्रशासनिक सेवा के उग रहे सपने

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ब्रह्मेश्वर मुखिया की पौत्री आकांक्षा सिंह ने सिविल सेवा परीक्षा में हासिल की 301वीं रैंक, बदलते समय और नई पीढ़ी की सोच बनी मिसाल                                       बक्सर खबर। भोजपुर की वही धरती, जो कभी जातीय संघर्ष और नरसंहारों की खबरों के कारण देशभर में चर्चा में रहती थी, आज एक नई वजह से सुर्खियों में है। आरा की आकांक्षा सिंह ने संघ लोक सेवा आयोग की वर्ष 2025 की सिविल सेवा परीक्षा में 301वीं रैंक हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। आकांक्षा की सफलता इसलिए भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि वह कभी बिहार की जातीय राजनीति और संघर्षों के केंद्र में रहे ब्रह्मेश्वर सिंह उर्फ ब्रह्मेश्वर मुखिया के परिवार से आती हैं। आकांक्षा, उनके पुत्र इंदुभूषण सिंह की बेटी हैं। ऐसे में उनकी उपलब्धि सिर्फ व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि बदलते भोजपुर और नई पीढ़ी की प्राथमिकताओं की एक नई कहानी भी बयां करती है।

आकांक्षा सिंह की शुरुआती पढ़ाई कैथोलिक मिशन स्कूल, आरा से हुई। इसके बाद उन्होंने एचडी जैन कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के बारे में आकांक्षा बताती हैं कि उन्होंने रोजाना लगभग आठ से दस घंटे नियमित अध्ययन किया। इसके साथ ही उन्होंने समसामयिक घटनाओं और विषयों की गहरी समझ विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया। सिविल सेवा के साक्षात्कार के दौरान बोर्ड ने उनसे भोजपुर जिले से जुड़े कई प्रश्न पूछे। हाल ही में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित भोजपुर के लोकगायक भारत सिंह भारती से संबंधित सवाल भी किए गए, जिनका आकांक्षा ने आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया।

परिवार के लोगों के अनुसार, ब्रह्मेश्वर मुखिया की इच्छा थी कि उनके परिवार से कोई सदस्य सिविल सेवा में जाकर प्रशासनिक दायित्व संभाले। आकांक्षा की यह सफलता उस सपने के साकार होने के रूप में देखी जा रही है। एक समय था जब भोजपुर का नाम अक्सर जातीय संघर्ष और निजी सेनाओं की घटनाओं के कारण सुर्खियों में आता था। लेकिन अब उसी धरती से प्रशासनिक सेवा में जाने वाली नई पीढ़ी सामने आ रही है। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि समय के साथ क्षेत्र की सोच और प्राथमिकताएं भी बदल रही हैं।

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