जिलाधिकारी ने दिए 75 वर्ष पुरानी पांडुलिपियों के सर्वेक्षण का निर्देश

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मठ-मंदिर, निजी संग्रह और पुस्तकालयों में छिपे प्राचीन ज्ञान का होगा डिजिटलीकरण                                  बक्सर खबर। भारतीय ज्ञान परंपरा को सहेजने और भावी पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने के उद्देश्य से भारत सरकार की फ्लैग्शिप पहल ज्ञान भारतम मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शहर के सीताराम उपाध्याय संग्रहालय में शनिवार को जिलाधिकारी साहिला की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि जिले के सभी सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों- जैसे मठ, मंदिर, शैक्षणिक संस्थान, पुस्तकालय तथा निजी संगठनों के साथ-साथ व्यक्तिगत संग्रहकर्ताओं के पास उपलब्ध पांडुलिपियों की पहचान कर उनकी सूची तैयार की जाए। इस कार्य की साप्ताहिक समीक्षा भी सुनिश्चित करने को कहा गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पांडुलिपि से तात्पर्य ऐसे हस्तलिखित ग्रंथों या पुस्तकों से है, जो कागज, भोजपत्र, ताड़पत्र, कपड़ा या धातु पर लिखे गए हों और कम से कम 75 वर्ष पुराने हों।

जिलाधिकारी ने सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने तथा अधिक से अधिक पांडुलिपियों के सर्वेक्षण हेतु प्रेरित करने का निर्देश दिया। साथ ही ज्ञान भारतम मोबाइल एप पर इन पांडुलिपियों को अपलोड कराना अनिवार्य किया गया है। हर प्रखंड में दो-दो पांडुलिपि सर्वेक्षक नामित किए जाएंगे, जो संबंधित संस्थानों एवं व्यक्तियों से संपर्क कर पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण सुनिश्चित करेंगे और साप्ताहिक प्रतिवेदन भी प्रस्तुत करेंगे। तैयार की जाने वाली सूची में संस्था या व्यक्ति का नाम, प्रभारी का विवरण, ई-मेल, मोबाइल नंबर, पांडुलिपियों की संख्या एवं उनकी अवधि का स्पष्ट उल्लेख करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, प्रत्येक केंद्र पर उपलब्ध पांडुलिपियों की विस्तृत सूची भी संकलित की जाएगी। जिलाधिकारी ने बताया कि ज्ञान भारतम मिशन के तहत पांडुलिपियां उनके मूल संग्रहकर्ता के पास ही सुरक्षित रहेंगी। मिशन का उद्देश्य केवल इन प्राचीन ज्ञान-संपदाओं का संरक्षण और डिजिटलीकरण कर उन्हें शोध, अनुवाद और प्रकाशन के माध्यम से वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना है।

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