ऐतिहासिक, भौगोलिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से सबसे उपयुक्त स्थान बक्सर खबर। पटना से अलग कर शाहाबाद प्रमंडल बनाने की मांग लंबे समय से चल रही है। वर्ष 1965 से ही बक्सर जनपद के प्रबुद्ध नागरिक और बुद्धिजीवी इस रणनीति पर काम कर रहे हैं। 1990 के दशक में जब शाहाबाद से अलग होकर भोजपुर, रोहतास और कैमूर जैसे नए जिले बने, तब भी बक्सर प्रमंडल की मांग को चौतरफा समर्थन मिला था। जिले के प्रतिष्ठित वरिष्ठ अधिवक्ता एवं प्रबुद्ध लेखक रामेश्वर प्रसाद वर्मा का कहना है कि बक्सर हर दृष्टिकोण से प्रमंडल मुख्यालय बनने के योग्य है। इसके लिए सभी आवश्यक प्रशासनिक प्रावधान और वैधानिक प्रक्रियाएं लगभग पूरी हो चुकी हैं। अब सिर्फ मुख्यालय के बिंदु पर आकर मामला अटका हुआ है। सरकार को इस पर जल्द ही सर्वमान्य और सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। बक्सर के गौरवशाली अतीत को रेखांकित करते हुए कहा कि यह भूमि पौराणिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से समृद्ध है। यह भगवान श्रीराम और महर्षि विश्वामित्र की तपोभूमि रही है। इसके साथ ही, बक्सर का किला और चौसा का ऐतिहासिक मैदान भारत के इतिहास को बदलने वाले युद्धों के गवाह रहे हैं। 1539 में शेरशाह सूरी और हुमायूं के बीच हुआ चौसा का युद्ध और 1764 का ऐतिहासिक ‘बक्सर का युद्ध’ इसी धरती पर लड़ा गया था, जिसने भारत का भाग्य तय किया था।
भौगोलिक दृष्टिकोण से बक्सर की सीमाएं उत्तर प्रदेश से जुड़ती हैं। गंगा नदी के तट पर स्थित होने के कारण इसका व्यापारिक और सामरिक महत्व हमेशा से रहा है। प्रमंडल मुख्यालय बनने से न केवल बक्सर, बल्कि आसपास के जिलों के लोगों को भी प्रशासनिक कार्यों में बड़ी सुविधा होगी। इससे आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सकेगा और लोगों को सुलभ न्याय मिलेगा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद के सहयोगी रामनरेश सिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे बलिदानियों का इस धरती से गहरा नाता रहा है। कला और साहित्य के क्षेत्र में शिवपूजन सहाय, उस्ताद बिस्मिल्लाह खान और डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा जैसी महान हस्तियों ने इस जिले का नाम रोशन किया है। जिले के प्रबुद्ध बुद्धिजीवियों, अधिवक्ताओं, समाजसेवियों ने एक सुर में बक्सर को प्रमंडल मुख्यालय बनाने की मांग का समर्थन किया है।


































































































