भागवत कथा सुनने से लोक-परलोक दोनों का होता है कल्याण: पौराणिक जी 

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सर्वजन कल्याण सेवा समिति के 18वें धर्म आयोजन में श्रीमद्भागवत कथा के महत्व पर प्रकाश                                                                       बक्सर खबर। रामरेखा घाट स्थित रामेश्वर नाथ मंदिर परिसर में सर्वजन कल्याण सेवा समिति सिद्धाश्रम धाम द्वारा आयोजित 18वें धर्म आयोजन के दूसरे दिन मंगलवार को श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराया गया। कथा के दौरान आचार्य कृष्णानंद शास्त्री पौराणिक जी महाराज ने श्रीमद्भागवत महापुराण के आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य वांग्मय मूर्ति है। कलियुग में यह ग्रंथ भगवान वासुदेव की चलती-फिरती प्रतिमा के समान है। इसके दर्शन, श्रवण और मनन मात्र से मनुष्य के जीवन का कल्याण संभव है।

पौराणिक जी ने कहा कि श्रद्धा और भक्ति के साथ सात दिनों तक भागवत कथा सुनने वाले श्रद्धालु का उद्धार निश्चित रूप से होता है। राजा परीक्षित और धुंधकारी के उद्धार का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि भागवत कथा मोक्ष प्रदान करने वाली है। उन्होंने कहा कि यह कथा केवल परलोक ही नहीं, बल्कि इस लोक में भी सुख, शांति, यश, प्रतिष्ठा और समृद्धि प्रदान करती है। भागवत कथा को कल्पवृक्ष की संज्ञा देते हुए कहा गया कि इसकी शरण में आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। कथा में भगवान नारायण की भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के महत्व का भी वर्णन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।

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