प्राचार्य डॉ. रामनरेश राय ने तकनीकी शिक्षा और सर्वांगीण विकास के प्रति किया जागरूक बक्सर खबर। इटाढ़ी रोड स्थित राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय के तत्वावधान में संचालित पहल कार्यक्रम के अंतर्गत बुधवार को महाविद्यालय परिसर में करियर गाइडेंस एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कक्षा 6 से 12 तक के लगभग 250 विद्यार्थी महाविद्यालय के ऑडिटोरियम में उपस्थित हुए। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा के महत्व, उच्च अध्ययन के विविध अवसरों तथा भविष्य की संभावनाओं के विषय में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। वक्ताओं ने बताया कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी दौर में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का क्षेत्र युवाओं के लिए असीम संभावनाएं समेटे हुए है। साथ ही विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया गया कि पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां भी उनके सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
विद्यार्थियों को संस्थान की विभिन्न प्रयोगशालाओं का अवलोकन करने हेतु प्रेरित किया गया, जिससे विज्ञान एवं तकनीक के प्रति उनकी जिज्ञासा और रुचि को बढ़ावा मिल सके। प्रयोगशालाओं के भ्रमण के दौरान छात्रों ने आधुनिक उपकरणों एवं प्रयोगों को नजदीक से देखा, जिससे उनमें खासा उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्थान के प्राचार्य प्रो. डॉ. रामनरेश राय ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर पर ही तकनीकी शिक्षा के प्रति जागरूक करना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों में आत्मविश्वास का संचार करते हैं और उन्हें अपने लक्ष्य के प्रति सजग एवं समर्पित बनने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि महाविद्यालय भविष्य में भी समाज के शैक्षणिक उत्थान के लिए निरंतर प्रयास करता रहेगा।
इस अवसर पर सह-प्राध्यापक डॉ. श्यामलाल वर्मा एवं डॉ. आरएन यादव भी उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्र में उपलब्ध करियर विकल्पों की जानकारी दी तथा उच्च शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उनके मार्गदर्शन से विद्यार्थियों में विशेष उत्साह एवं जिज्ञासा देखने को मिली। उल्लेखनीय है कि संपूर्ण अभियान का संचालन पहल कार्यक्रम के संयोजक डॉ. रामदयाल कुशवाहा के नेतृत्व में किया गया। पिछले पंद्रह दिनों के दौरान महाविद्यालय के तृतीय सेमेस्टर के छात्र सौरभ मिश्रा एवं उनकी लगभग पंद्रह सदस्यीय टीम ने निकटवर्ती गांवों के उच्च एवं मध्य विद्यालयों का भ्रमण कर विद्यार्थियों को महाविद्यालय आने के लिए प्रेरित किया। उनके सतत प्रयासों का परिणाम ऑडिटोरियम में लगभग ढाई सौ विद्यार्थियों की प्रभावशाली उपस्थिति के रूप में सामने आया।
































































































