सलाह : मोबाइल व कम्प्यूटर चलाने वाले करें 20-20 फार्मूले का प्रयोग

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-मिलिए आंख की डाक्टर निधि से
-आंखों को लेकर बरते सावधानी, गर्मी में होती है विशेष परेशानी
बक्सर खबर (इनसे मिलिए)। रविवार को प्रकाशित होने वाले हमारे साप्ताहिक कालम इनसे मिलिए में हमारी आज की मेहमान हैं डाक्टर निधि। इनसे हमारी टीम की आज रविवार को मुलाकात हुई। चर्चा हुई तो पता चला। गर्मी का मौसम आंखों के लिए बहुत खतरनाक है। शायद यह आप भी जानते हों। लेकिन, उन्होंने जो दूसरी बात बतायी। वह हैरान करने वाली थी। बच्चों में आंख की बीमारी तेजी से बढ़ रही है। दो दशक पहले जहां यह बीमारी तीन से चार प्रतिशत थी। अब 30 फीसदी बच्चों तक पहुंच गई है। उनकी बातों से हमारा माथा ठनका। इसका कारण क्या है और इससे कैसे बचा जाए? इस विषय पर हमने इनसे बातें की। उन्होंने जो बताया उसे आप यहां विस्तार से जान और पढ़ सकते हैं।

तिरछी हो रही है बच्चों की आंख, करें 20-20 फार्मूले का इस्तेमाल
बक्सर खबर। छोटे बच्चों को बचपन से ही मोबाइल और टीवी की आदत लग जा रही है। इस वजह से उनकी नजर तिरछी हो रही है। इसकी मुख्य वजह मोबाइल और कम्प्यूटर का प्रयोग है। शोधकर्ताओं ने इसे कम्प्यूटर विजन सिंड्रोम का नाम दिया है। यह बीमारी सिर्फ बच्चों ही नहीं बड़ों को भी प्रभावित कर रही है। इससे बचने के लिए कम्प्यूटर का अत्यधिक इस्तेमाल करने वालों को 20-20-20 फार्मूले का प्रयोग करना चाहिए। क्या है यह फार्मूला? हमले यह सवाल दोहराया। उनका जवाब था, जिस स्क्रीन पर आप लगातार देख रहे हैं। तो 20-20 मिनट के अंतराल पर स्क्रीन से नजर हटाएं। और 20 सेकंड तक कहीं दूर देखें। इससे आंखों को राहत भी मिलेगी और व्यायाम भी हो जाएगा।


गर्मी में होता है ज्यादा इनफेक्शन, रखें ध्यान
बक्सर खबर। गर्मी का मौसम आंखों को बहुत प्रभावित करता है। इस दौरान इनफेक्शन का डर बना रहता है। आंखों को बचाएं, उन्हें मले और रगड़े नहीं। हाथों को साफ रखें। क्योंकि अक्सर वह आंख तक जाते रहते हैं। आंख को धोते समय ध्यान रखें, पानी साफ हो। जिन बच्चों में आंख की बीमारी हो। जैसे दूर दृष्टि दोष, उन्हें अधिक पानी पिलाएं। हरी सब्जियों का सेवन कराएं। इससे उन्हें लाभ मिलता है।
डाक्टर निधि का एक परिचय
बक्सर खबर। डा. निधि बक्सर की महिला नेत्र चिकित्सक हैं। जो सप्ताह में दो दिन, अर्थात शनिवार और रविवार को बाजार समिति रोड में पांडेय पट्टी रेलवे क्रासिंग के पास अपने क्लिनिक में बैठती हैं। सप्ताह के अन्य पांच दिन पटना में रहती हैं। लेकिन, इस शहर से उनका मिट्टी का रिश्ता है। जो उन्हें यहां खींच लाया है। देवनन्दन हॉस्पीटल एवं आई केयर क्लिनिक उनका मौजूदा ठिकाना है।

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