फर्जी शिक्षक मामले के मुख्य अभियुक्त को बना रखा था कंप्यूटर ऑपरेटर, 7 प्रखंडों के बीपीएम की सेवा विस्तार में भी बड़ी वित्तीय अनियमितता उजागर बक्सर खबर। तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी संदीप रंजन के खिलाफ क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक, पटना प्रमंडल ने एक गंभीर जांच रिपोर्ट प्रशासन निदेशक को सौंप दी है। विमल कुमार की शिकायत पर हुई इस जांच में विभाग के नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाने का मामला सामने आया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, बक्सर जिला शिक्षा कार्यालय में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर आदित्य रंजन पर फर्जी शिक्षक के रूप में बहाल होने का गंभीर आरोप है। उच्च न्यायालय के आदेश पर हुई निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच में वे प्राथमिक अभियुक्त हैं। प्रधान सचिव के वर्ष 2013 के आदेश के मुताबिक ऐसे दागी कर्मियों पर सख्त कार्रवाई होनी थी, जिसे दबाकर रखा गया।
शिक्षा विभाग के स्पष्ट निर्देश हैं कि कार्यालयों में डेटा एंट्री ऑपरेटर की सेवा बेलट्रॉन या जिला समाहरणालय के पैनल से ही ली जाए। इसके विपरीत, डीईओ ने अपनी मर्जी से दागी कंप्यूटर ऑपरेटर और एक अन्य एमटीएस कर्मी को कार्यालय में बनाए रखा। रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि बक्सर, डुमराव, इटाढ़ी, ब्रह्मपुर, सिमरी, राजपुर और नावानगर प्रखंडों में कार्यरत बीपीएम की सेवा को नियम विरुद्ध बढ़ाया जा रहा है। जांच समिति ने निर्देश दिया है कि राशि की उपलब्धता के आधार पर इन्हें केवल अधिकतम 3 माह का सेवा विस्तार दिया जा सकता है। बजट आवंटन न होने पर ये सभी कर्मी स्वतः कार्यमुक्त माने जाएंगे। भविष्य में इनके मानदेय भुगतान को लेकर भारी वित्तीय अनियमितता की स्थिति बन सकती है।

































































































