18वें धार्मिक आयोजन के चौथे दिन आचार्य कृष्णानंद शास्त्री ने किया श्रीमद्भागवत की महिमा का वर्णन बक्सर खबर। रामरेखा घाट स्थित रामेश्वर नाथ मंदिर परिसर में सर्वजन कल्याण सेवा समिति सिद्धाश्रम धाम द्वारा आयोजित 18वें धर्म आयोजन के चौथे दिन गुरुवार को कथावाचक आचार्य कृष्णानंद शास्त्री पौराणिक जी महाराज ने श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भागवत महापुराण सभी वेदों, पुराणों, स्मृतियों और धर्मशास्त्रों का सार है। यह चिंतामणि के समान है, जो श्रद्धापूर्वक इसके सानिध्य में रहने वालों की मनोकामनाएं पूर्ण करता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन में प्राप्त करने योग्य चार पुरुषार्थ-धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष हैं। भागवत कथा इन चारों की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। व्यक्ति अपनी रुचि और संस्कार के अनुसार जो चाहता है, उसे वही प्राप्त होता है।
उन्होंने बताया कि भागवत महापुराण ने भक्तों को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का संदेश दिया है। परीक्षित को मोक्ष, कुंती को भक्ति तथा भीष्म को शक्ति प्रदान करने वाला यह ग्रंथ कलियुग में मानव कल्याण का अमोघ साधन है। पौराणिक जी ने कहा कि भागवत कथा का श्रवण करने से चारों वेदों, पुराणों और धर्मशास्त्रों के अध्ययन के समान पुण्यफल प्राप्त होता है। इसमें भगवान के 24 प्रमुख अवतारों, समुद्र मंथन से प्राप्त 14 रत्नों तथा सूर्यवंश और चंद्रवंश के गौरवशाली चरित्रों का वर्णन है। उन्होंने कहा कि मनुष्य का परम लक्ष्य मोक्ष होना चाहिए। सांसारिक वस्तुएं नश्वर हैं, जबकि भगवान की भक्ति ही भवसागर से पार लगाने का माध्यम है। धन केवल जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति करता है और कामना भी स्वस्थ शरीर तक ही सीमित रहती है, लेकिन धर्म और भक्ति मनुष्य को मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करते हैं।
आचार्य कृष्णानंद शास्त्री ने श्रद्धालुओं से मानव जीवन को सफल बनाने के लिए नियमित रूप से भागवत कथा का श्रवण करने का आह्वान किया। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्तिभाव से कथा का रसपान किया।

































































































