न्यायालय की अवमानना और शिक्षकों के वेतन भुगतान में लापरवाही पर कड़ा रुख बक्सर खबर। स्थानीय व्यवहार न्यायालय ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और अदालती आदेशों की लगातार अनदेखी पर सख्त रुख अख्तियार किया है। सिविल जज (जूनियर डिवीजन) प्रथम के न्यायालय ने केस नंबर 08/2022 (विक्रमादित्य एवं अन्य बनाम राज्य सरकार) में सुनवाई करते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी बक्सर समेत विभाग के कई आला अधिकारियों के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट निर्गत किया है। अदालती आदेश के अनुसार, यह मामला बुनियादी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के बकाया वेतन भुगतान से जुड़ा है। न्यायालय ने इस संबंध में 20 मार्च 2023 को ही समन जारी किया था, लेकिन अधिकारियों ने तीन वर्षों तक इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया।
बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद विभाग की इस उदासीनता को न्यायालय ने गंभीरता से लिया और अंततः 15 अप्रैल को गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल 2026 को निर्धारित है। शिक्षा विभाग की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होती। जिला अपीलीय प्राधिकार के पीठासीन पदाधिकारी अजय कुमार पाण्डेय ने भी शुक्रवार को जिला शिक्षा पदाधिकारी पर गाज गिराई है। अन्य न्यायिक मामलों में आदेशों की अवहेलना और कर्तव्यहीनता के कारण डीइओ पर दो अलग-अलग मामलों में 25-25 हजार रुपये (कुल 50 हजार) का जुर्माना लगाया गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान जिला शिक्षा पदाधिकारी संदीप रंजन फिलहाल अवकाश पर हैं। विभागीय हलकों में इस कार्रवाई को लेकर हड़कंप मचा हुआ है। चर्चा है कि एक तरफ जहां विभाग के कामकाज को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ गिरफ्तारी वारंट और भारी जुर्माना अधिकारियों की प्रशासनिक अक्षमता पर कड़ा प्रहार है।
































































































