कालिया नाग मर्दन व गोवर्धन लीला का हुआ भावपूर्ण वर्णन

0
6

आचार्य रणधीर ओझा ने श्रीकृष्ण की लीलाओं के माध्यम से दिया प्रेम, भक्ति और प्रकृति संरक्षण का संदेश                बक्सर खबर। चौसा में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के पांचवें दिन गुरुवार को आचार्य रणधीर ओझा जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल्यकालीन लीलाओं, कालिया नाग मर्दन और गोवर्धन पर्वत की दिव्य कथा का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। कथा के दौरान भजन-कीर्तन और संगीत की मधुर स्वर लहरियों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। आचार्य श्री ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का मनोहारी वर्णन करते हुए कहा कि ये लीलाएं केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि गहरे आध्यात्मिक संकेतों से भरी हैं। उन्होंने बताया कि गोकुल में माखन चोरी की लीला प्रेम, श्रद्धा और निष्कलंक भक्ति का प्रतीक है। भगवान केवल उसी हृदय को अपनाते हैं जो निर्मल और निष्कपट होता है। कथा के दौरान यशोदा मैया द्वारा श्रीकृष्ण को ऊखल से बांधने की लीला का मार्मिक प्रसंग भी सुनाया गया। आचार्य श्री ने कहा कि यह घटना बताती है कि पूरे संसार का पालन करने वाला भगवान भी अपने भक्तों के सच्चे प्रेम से बंध जाता है।

इसके बाद उन्होंने यमुना तट पर कालिया नाग मर्दन की लीला का वर्णन करते हुए बताया कि कालिया नाग ने यमुना को विषैला बना दिया था, जिससे गोकुलवासी भयभीत थे। तब बालकृष्ण ने यमुना में कूदकर कालिया नाग के फनों पर नृत्य किया और उसे पराजित कर यमुना को पुनः पवित्र किया। आचार्य श्री ने कहा कि कालिया नाग हमारे भीतर के अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या और लोभ जैसी विषैली प्रवृत्तियों का प्रतीक है, जिनका नाश भगवान की कृपा से संभव है। कथा में आगे गोवर्धन लीला का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि जब इंद्रदेव ने ब्रज में प्रलयंकारी वर्षा की, तब श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी अंगुली पर सात दिन तक गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की। यह लीला प्रकृति पूजन, अहंकार के दमन और सामूहिक एकता का संदेश देती है। कथा के समापन पर आचार्य रणधीर ओझा ने कहा कि श्रीकृष्ण की लीलाएं हमें जीवन में प्रेम, सेवा, धैर्य और समर्पण का मार्ग दिखाती हैं। यदि मनुष्य इन गुणों को अपनाए तो जीवन स्वयं एक दिव्य लीला बन सकता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here