कुख्यात मुन्ना राजभर को आजीवन कारावास, दो लाख का जुर्माना

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-राजपुर इलाके में एक साथ तीन हत्याएं कर मचा दी थी सनसनी
बक्सर खबर। दस्यु सरगना सुरेश राजभर के भाई मुन्ना राजभर को आजीवन कारावास की सजा हुई है। यह फैसला पिछले सप्ताह एडीजे चार की अदालत ने सुनाया। मुन्ना  राजभर पिता खरपतु राजभर, ग्राम इटवां,थाना  राजपुर का मूल निवासी है। लेकिन, पुलिस की आंख में धूल झोंकने के लिए यह गलत आधार कार्ड बनवा कर रोहतास के दिनारा इलाके में रहता था। जहां से उसे पुलिस ने दबोचा। यह जिले के टॉप टेन अपराधियों में तब नंबर वन पर था। क्योंकि राजपुर के लक्षमणपुर में हुई पांच हत्याओं में इसकी तलाश थी। लगभग तीन वर्ष पहले उसकी गिरफ्तारी एसपी नीरज कुमार सिंह के कार्यकाल में हुई। और सजा का काम एसपी शुभम आर्य के कार्यकाल में।

पुलिस को इसका श्रेय देने की यहां एक वजह है। पुलिस की जांच जब ठोस होती है, तभी आरोपी को न्यायालय दोषी करार देता है। घटना से जुड़े गवाहों की भूमिका भी अहम है। राजपुर के थानाध्यक्ष रहे युसूफ अंसारी के इनपुट पर यह गिरफ्तार किया गया। घटना  अप्रैल 2017 की है। जब मुन्ना उत्तर प्रदेश की जेल से बाहर आया था। फिर राजपुर के लक्ष्मणपुर में जहां सुरेश राजभर पुलिस की मुठभेड़ में मारा गया था। उसी गांव में इसने साथियों समेत मिलकर तीन हत्याएं की। इसी केस में फिलहाल मुन्ना को सजा हुई है। मुकदमे की पैरवी कर रहे लोग अभियोजक राजेन्द्र प्रसाद के अनुसार हत्या के मामले में आजीवन कारावास व 1,50,000 का जुर्माना हुआ है।

गिरफ्तारी के वक्त ली गई तस्वीर, एसपी नीरज कुमार के साथ

आर्म्स एक्ट में सात साल की सजा और 50 हजार का जुर्माना हुआ है। रकम जमा नहीं करने की स्थिति में एक वर्ष व छह माह का अतिरिक्त कारावास काटना होगा। मुन्ना के विरूद्ध जिले में कुल सात हत्याओं का केस दर्ज है। उत्तर प्रदेश में भी दो मामले इसके खिलाफ हैं। जब यह गिरफ्तार हुआ था, उस समय एसपी ने बताया था। यह माया शंकर राम पिता रामचंद्र राम, निवासी दिल्ली का आधार कार्ड लेकर चलता था। ताकि पुलिस को पकड़े जाने पर चकमा दे सके। इस कुख्यात अपराधी को सजा दिलाने में जिले के पुलिस कप्तान शुभम आर्य और उनकी टीम का विशेष योगदान है।
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