मात्र 20-25 दिनों में शुरू होगी कमाई, पुआल और भूसे के सदुपयोग से कृषि विज्ञान केंद्र बदल रहा ग्रामीण युवाओं की तकदीर बक्सर खबर। लालगंज स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में गुरुवार को ग्रामीण बेरोजगार युवाओं के लिए आयोजित पांच दिवसीय मशरूम उत्पादन सह आय अर्जन का स्रोत विषयक कौशल विकास प्रशिक्षण का चौथा दिन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह प्रशिक्षण 5 से 9 जनवरी तक चल रहा है, जिसमें जिले के विभिन्न गांवों से आए 25 युवक भाग ले रहे हैं। मुख्य प्रशिक्षक सह पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. रामकेवल ने बताया कि मशरूम उत्पादन ऐसा व्यवसाय है, जिसमें खेत, जुताई, सिंचाई या खाद की आवश्यकता नहीं होती। मात्र 20–25 दिनों में आय शुरू हो जाती है, जो इसे कृषि से जुड़े अन्य व्यवसायों से अलग और आकर्षक बनाता है। उन्होंने बताया कि बक्सर धान-गेहूं फसल प्रणाली का अग्रणी जिला है, इसलिए मशरूम उत्पादन के लिए जरूरी धान की पुआल और गेहूं का भूसा यहां सस्ते और आसानी से उपलब्ध हैं। साथ ही मशरूम का उन्नत स्पॉन भी कृषि विज्ञान केंद्र के तकनीकी सहयोग से जिले की प्रयोगशालाओं में ही तैयार किया जा रहा है।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बटन मशरूम, ऑयस्टर मशरूम, दूधिया मशरूम और पुआल मशरूम की सैद्धांतिक और व्यावहारिक जानकारी पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से दी गई। साथ ही प्रैक्टिकल भी कराया गया। मशरूम को हिंदी में खुम्बी या छत्रक भी कहा जाता है। यह प्रोटीन, विटामिन, फाइबर और खनिजों से भरपूर होता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। आज शादी-विवाह और सांस्कृतिक आयोजनों में मशरूम एक पसंदीदा व्यंजन बन चुका है, जिससे इसके विपणन की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ. देवकरण ने प्रशिक्षार्थियों को मशरूम के मूल्यवर्धन से जुड़े विभिन्न उत्पादों और उनकी मार्केटिंग की जानकारी दी। उन्होंने युवाओं से मशरूम को स्थायी आय के स्रोत के रूप में अपनाने का आह्वान किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। प्रशिक्षण के चौथे दिन सभी प्रतिभागियों को चुरामनपुर स्थित मशरूम उत्पादक किसान विनोद सिंह के फार्म का भ्रमण कराया गया। यहां उन्होंने अपने अनुभव साझा किए और मशरूम उत्पादन की व्यवहारिक बारीकियों को सरल शब्दों में समझाया।

































































































