सरसों की बंपर पैदावार, किसानों को मिली नई तकनीक की जानकारी

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क्लस्टर पद्धति से उन्नत खेती का सफल प्रदर्शन, प्रति हेक्टेयर 20–22 क्विंटल तक उपज                          बक्सर खबर। इटाढ़ी प्रखंड के हरपुर गांव में राष्ट्रीय तिलहन खाद्य मिशन के अंतर्गत क्लस्टर पद्धति के तहत लगाए गए सरसों फसल के सफल उत्पादन पर बुधवार को प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर किसानों को उन्नत खेती तकनीकों की जानकारी दी गई और बेहतर उत्पादन के लिए प्रेरित किया गया। गांव के 50 से अधिक किसानों के खेतों में कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा सरसों की उन्नत किस्मों पीएम-37 एवं आरएच-725 का प्रदर्शन किया गया था। इसके साथ ही पंक्ति विधि से बुवाई, बीज उपचार, खरपतवार प्रबंधन तथा सल्फर के प्रयोग जैसी वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाया गया। इन तकनीकों के उपयोग से फसल में अच्छी वृद्धि देखी गई, साथ ही रोग एवं कीटों का प्रकोप भी नहीं हुआ। किसानों को औसतन 20 से 22 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त हो रही है, जो क्षेत्र के लिए उत्साहजनक है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आईसीएआर-आरसीईआर, पटना के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. उज्जवल कुमार ने किसानों को बधाई देते हुए उनके खेतों का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि तिलहनी फसलों में सरसों का महत्वपूर्ण स्थान है। इसकी खेती में लागत कम और मुनाफा अधिक होता है, जिससे किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है। स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. देवकरण ने अतिथियों एवं किसानों का स्वागत करते हुए तिलहनी फसलों में सल्फर के महत्व और उसके सही उपयोग की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम के समन्वयक हरिगोविंद ने बताया कि प्रक्षेत्र दिवस का मुख्य उद्देश्य क्लस्टर पद्धति के माध्यम से सरसों की उन्नत किस्मों के प्रति किसानों को जागरूक करना तथा तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने कहा कि यदि सरसों की बुवाई अक्टूबर के मध्य से 10 नवंबर तक कर दी जाए, तो प्रति हेक्टेयर 25 से 30 क्विंटल तक उपज प्राप्त की जा सकती है।

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