सिविल सर्जन से लिखित शिकायत, विधायक को दी जानकारी, सुधार नहीं होने पर कोर्ट जाने की दी चेतावनी बक्सर खबर। स्थानीय सदर अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर मरीजों की जेब ढीली करने और कमीशनखोरी का एक बड़ा मामला सामने आया है। अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे व्यवहार न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता रामानंद मिश्रा उर्फ टूनटून मिश्रा ने अस्पताल कर्मियों और बाहरी टीम पर गंभीर आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने इसकी लिखित शिकायत सिविल सर्जन से की है। सदर अस्पताल में हर महीने के दूसरे और चौथे मंगलवार को पटना के प्रसिद्ध मेदांता अस्पताल की कार्डियो (हृदय रोग) टीम मरीजों की जांच के लिए आती है। 26 मई को व्यवहार न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता रामानंद मिश्रा अपने सीने की जांच कराने सदर अस्पताल पहुंचे थे। पर्चा कटवाकर जब वह जांच कराने पहुंचे, तो वहां मौजूद मेदांता टीम के सदस्य मोहम्मद रेयाज कुरैशी ने उन्हें अस्पताल से बाहर स्थित आशीर्वाद डायग्नोस्टिक सेंटर से इको और अन्य जांच करवाकर आने को कहा।
बाहर से निजी सेंटर से जांच कराने की बात सुनते ही अधिवक्ता रामानंद मिश्रा भड़क गए। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि सदर अस्पताल के भीतर कमीशन का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। गरीब मरीजों को सरकारी सुविधाओं का लाभ देने के बजाय निजी सेंटरों में भेजकर मोटी रकम ऐंठी जा रही है। शिकायत पत्र में अधिवक्ता ने लिखा: यह कृत्य सेवा में घोर त्रुटि की श्रेणी में आता है। यह डॉक्टरों और निजी सेंटरों की मिलीभगत से आम जनता के पैसों का सरासर दुरुपयोग है। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ने तुरंत सदर विधायक आनंद मिश्र को फोन पर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने सिविल सर्जन को लिखित आवेदन सौंपकर मामले में अपने स्तर से उचित कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि बक्सर की आम जनता को इस ‘लूट-खसोट’ से बचाया जा सके। अधिवक्ता रामानंद मिश्रा ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सदर अस्पताल में कमीशन का यह खेल जल्द बंद नहीं हुआ, तो वह इस भ्रष्टाचार के खिलाफ बहुत जल्द न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।































































































