प्रो. दिवाकर पाण्डेय ने कृति को बताया भोजपुरी साहित्य का मील का पत्थर बक्सर खबर। आचार्य शिवपूजन सहाय के पैतृक गांव उनवांस स्थित एक निजी विद्यालय में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर साहित्यिक गरिमा से भरपूर समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रो० नर्वदेश्वर राय की महत्वपूर्ण कृति भोजपुरी नाट्य-शास्त्र का लोकार्पण वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के भोजपुरी विभागाध्यक्ष दिवाकर पाण्डेय के करकमलों से संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता भोजपुरी साहित्य मंडल के अध्यक्ष प्रो० अरुण मोहन भारवि ने की, जबकि मंच संचालन महासचिव डॉ० वैरागी प्रभाष चतुर्वेदी ने किया। अतिथियों का स्वागत अधिवक्ता प्रमोद शंकर चौबे ने किया। अपने संबोधन में प्रो० दिवाकर पाण्डेय ने कहा कि शास्त्र लोक से बनता है, लोक शास्त्र से नहीं। उन्होंने कहा कि भोजपुरी नाट्य-शास्त्र पुस्तक भोजपुरी साहित्य के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगी। यह कृति भोजपुरी लेखकों और शोधकर्ताओं को नए आयाम देगी तथा लेखन के लिए व्यापक स्पेस तैयार करेगी।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो० अरुण मोहन भारवि ने मातृभाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि मातृभाषा हमारी पहचान और संवेदना की भाषा है। यह मां की भाषा है, जिससे व्यक्ति का पहला भावनात्मक संबंध स्थापित होता है। अधिवक्ता प्रमोद शंकर चौबे ने कहा कि भाषा के उत्थान के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम निरंतर होते रहने चाहिए, ताकि नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे। कार्यक्रम में भगवान पांडेय, रामेश्वर प्रसाद वर्मा, धन्नुलाल प्रेमातुर, श्री राजा रमण पांडेय, गणेश उपाध्याय, शशिभूषण मिश्र, धनंजय गुड़ाकेश, मिहिर तिवारी, बृज बिहारी राम, बृजेश कुमार शर्मा, पंकज पाण्डेय, रामवृक्ष, गुप्तेश्वर चौबे, अमरेंद्र दुबे, कौशल शर्मा, अभय तिवारी, प्रदीप चौबे तथा कवि कमलापति पाण्डेय ‘निडर’ ने भी अपने विचार रखे।
इस अवसर पर जूही केसरी, रचना, दिलीप ओझा, शोध छात्र राजेश कुमार, आदित्य सहित विद्यालय के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंतर्गत मातृभाषा और उसकी चुनौतियां विषय पर संगोष्ठी भी आयोजित की गई, जिसमें वक्ताओं ने वैश्वीकरण के दौर में क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण, शिक्षा में मातृभाषा की भूमिका तथा नई पीढ़ी में भाषाई चेतना के विकास पर गंभीर विचार-विमर्श किया।






























































































