-प्रत्येक वर्ष यहां लगता है मशहूर शिवरात्रि मेला, दो प्रतियोगिताओं का आयोजन
बक्सर खबर। ब्रह्मपुर का फगुनी शिवरात्रि मेला पूरे बिहार में मशहूर है। यहां बिहार और यूपी से घोड़ों आते हैं। बुधवार को यहां घुड़दौड़ का आयोजन हुआ। व्यापारी संघ एवं घोड़ा मालिकों ने सर्वसम्मति से आपस में मिलकर भव्य घोड़ा रेस प्रतियोगिता का आयोजन किया। प्रतियोगिता में तीन दर्जन से अधिक घोड़ा एवं घोड़ियों ने हिस्सा लिया। मुख्य घोड़ा दौड़ प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार पटना के रुदल गोप को प्राप्त हुआ। उनके घोड़े का नाम “बाबर” है, जबकि घुड़सवार मेघु रहे। जिन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए सभी प्रतिस्पर्धियों को पीछे छोड़ दिया। द्वितीय पुरस्कार रघुनाथपुर, बेगूसराय के प्रिंस यादव को मिला। उनके घोड़े “रघुनाथपुर एक्सप्रेस” के घुड़सवार राजेश यादव थे, जिन्होंने कड़ी टक्कर दी। तृतीय पुरस्कार गंगौली, बक्सर के योगेंद्र ठाकुर को प्रदान किया गया। उनके घोड़े के घुड़सवार गूंगा रहे, जिन्होंने शानदार नियंत्रण और गति का प्रदर्शन किया।
वहीं विशेष पुरस्कार के रूप में केशोवपुर, बक्सर के छोटू मुखिया को सम्मानित किया गया। उनके घोड़े का नाम “वीरु” है, जबकि घुड़सवार मनीष कुमार रहे। प्रतियोगिता के दौरान उनके घोड़े की चुस्ती-फुर्ती और संतुलन ने दर्शकों का मन मोह लिया। इसके अतिरिक्त “दो दांत” वर्ग के घोड़ों की अलग दौड़ प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। इस वर्ग में धामनिया, आरा के पुतुल चौबे का घोड़ा प्रथम स्थान पर रहा। द्वितीय पुरस्कार अशोक ठेकेदार के घोड़े को मिला, जबकि तृतीय स्थान गौड़ाढ, शाहपुर के शंभू पासवान के घोड़े ने प्राप्त किया। इस श्रेणी की दौड़ भी काफी रोमांचक रही और दर्शकों ने जोरदार उत्साहवर्धन किया। घोड़ी वर्ग की रेस प्रतियोगिता भी मेले का विशेष आकर्षण रही। नियाज़ीपुर के हीरा यादव की घोड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान हासिल किया। द्वितीय पुरस्कार ढाबी के रामचंद्र यादव की घोड़ी को मिला, जबकि तृतीय पुरस्कार तूफान सिंह की घोड़ी को प्रदान किया गया। इस प्रतियोगिता में घोड़ियों की गति, संतुलन और प्रशिक्षण देखने लायक रहा।
इसके साथ ही छोटी “छकरी” (बच्चा घोड़ा/घोड़ी) दौड़ का भी आयोजन किया गया, जिसने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। इस प्रतियोगिता में धामनिया, आरा के पुतुल चौबे ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। द्वितीय पुरस्कार केशवपुर के छोटू मिश्रा मुखिया को मिला, जबकि तृतीय पुरस्कार सिसई, सिवान के विजय यादव की घोड़ी को प्रदान किया गया। सभी प्रतियोगिताएँ पाँच-पाँच राउंड में कराई गईं, जिससे प्रतिस्पर्धा और भी रोमांचक बन गई। प्रत्येक राउंड में घुड़सवारों ने अपनी कला, संतुलन और घोड़ों की रफ्तार का बेहतरीन प्रदर्शन किया। आयोजन स्थल पर सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण तथा व्यवस्था के पुख्ता इंतज़ाम किए गए थे, जिससे पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। व्यापारी संघ एवं घोड़ा मालिकों ने संयुक्त रूप से बताया कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएँ न केवल मेले की परंपरा को जीवित रखती हैं, बल्कि घोड़ा पालन एवं व्यापार को भी बढ़ावा देती हैं। विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया तथा उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया। एक दूसरी प्रतियोगिता भी स्व मार्कडेय सिंह की स्मृति में संपन्न हुई। जिसमें अजय सिंह साथ का घोड़ा प्रथम आया।































































































