–सांसद मनन मिश्रा ने उठाया मुद्दा, राजकुमार चौबे ने कहा- बक्सर को राष्ट्रीय पहचान दिलाने तक जारी रहेगा संघर्ष बक्सर खबर। बक्सर को अयोध्या–काशी की तर्ज पर विकसित करने की मांग अब राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनती दिख रही है। विश्वामित्र सेना द्वारा लंबे समय से चलाए जा रहे अभियान का असर उच्च सदन में स्पष्ट रूप से देखने को मिला, गुरुवार को राज्यसभा में बक्सर के समग्र विकास का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। राज्यसभा में चर्चा के दौरान सांसद मनन कुमार मिश्रा ने केंद्र सरकार का ध्यान बक्सर जिले में स्थित ऐतिहासिक एवं पौराणिक तीर्थ स्थलों तथा क्षेत्र के समग्र विकास की ओर आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि बक्सर प्राचीन काल से धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। रामरेखा घाट, सिद्धाश्रम, वामन अवतार स्थल, नाथ बाबा मंदिर, बाबा ब्रह्मेश्वर नाथ मंदिर सहित कई ऐसे तीर्थ स्थल हैं, जिनका उल्लेख धार्मिक ग्रंथों और ऐतिहासिक स्रोतों में मिलता है।
सांसद ने कहा कि अयोध्या, काशी, उज्जैन की भांति बक्सर भी राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण धार्मिक क्षेत्र बनने की पूर्ण क्षमता रखता है, लेकिन आज भी यहां आधारभूत सुविधाओं, धार्मिक पर्यटन ढांचे, आवागमन, स्वच्छता और श्रद्धालुओं के लिए समुचित व्यवस्थाओं का अभाव है। उन्होंने केंद्र सरकार से सवाल किया कि बक्सर में पर्यटन आधारित विकास, सड़क एवं परिवहन, रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए कौन-कौन सी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। साथ ही अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों की तरह बक्सर के समग्र विकास के लिए ठोस पहल की मांग की।

गौरतलब है कि बक्सर के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए विश्वामित्र सेना लगातार सक्रिय रही है। संगठन के राष्ट्रीय संयोजक राजकुमार चौबे ने सनातन जोड़ो यात्रा, गंगा आरती, रामनवमी पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा और पटना सहित विभिन्न स्थानों पर प्रेस वार्ताओं के माध्यम से बक्सर के विकास का मुद्दा उठाया है। राजनीतिक गलियारों में बक्सर को लेकर बढ़ती चर्चा को संगठन अपने प्रयासों की सफलता के रूप में देख रहा है। राज्यसभा में उठे मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय संयोजक राजकुमार चौबे ने कहा कि यह केवल शुरुआत है। उन्होंने विश्वास जताया कि संसद में उठी यह आवाज जल्द ही बक्सर की धरती पर विकास कार्यों के रूप में दिखाई देगी। उन्होंने कहा कि संगठन अपने संकल्पों के प्रति प्रतिबद्ध है और जब तक बक्सर की पहचान अयोध्या और काशी की तरह राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित नहीं हो जाती, तब तक विश्वामित्र सेना अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी।































































































