होम डिलीवरी अनिवार्य, लाइन लगाकर वितरण पर रोक, शिकायत के लिए 24×7 कंट्रोल रूम सक्रिय बक्सर खबर। अपर समाहर्ता अरुण कुमार सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को समाहरणालय सभाकक्ष में एलपीजी आपूर्ति व्यवस्था को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। उन्होंने बताया कि जिले में गैस आपूर्ति को सुचारू एवं पारदर्शी बनाने के लिए अनुमंडल पदाधिकारी, सहायक जिला आपूर्ति पदाधिकारी एवं प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी द्वारा प्रतिदिन गैस एजेंसियों का भ्रमण एवं निरीक्षण किया जा रहा है। जिलाधिकारी साहिला के निर्देश पर जिले की कुल 27 गैस एजेंसियों की सघन जांच के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है। प्रत्येक टीम में एक वरीय दंडाधिकारी/पदाधिकारी के साथ एक पुलिस पदाधिकारी को प्रतिनियुक्त किया गया है। सभी टीमों द्वारा एजेंसियों का निरीक्षण किया जा चुका है, जिसमें जिला एवं प्रखंड स्तर के अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी रही। प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि 13 मार्च से 18 मार्च तक कुल 31,583 गैस सिलेंडरों का वितरण किया गया है, जबकि 18 मार्च तक एजेंसियों के पास 4,612 सिलेंडर का स्टॉक उपलब्ध है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी परिस्थिति में गैस एजेंसी या गोदाम पर उपभोक्ताओं की लाइन लगाकर सिलेंडर वितरण नहीं किया जाएगा। ऐसा पाए जाने पर संबंधित एजेंसी के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी। सभी एजेंसियों को होम डिलीवरी सुनिश्चित करने तथा बुकिंग के 2 से 3 दिनों के भीतर सिलेंडर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए जिला नियंत्रण कक्ष (06183-223333) 24×7 संचालित किया जा रहा है, जहां अब तक 92 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 45 का निष्पादन किया जा चुका है, जबकि शेष पर कार्रवाई जारी है। इसके अलावा सभी गैस एजेंसियों को अपने कार्यालय के बाहर सूचना पट्ट लगाने का निर्देश दिया गया है, जिसमें स्टॉक की अद्यतन स्थिति, वितरण की तिथि एवं आगामी वितरण कार्यक्रम की जानकारी प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। जिला प्रशासन ने एजेंसियों को कैम्प मोड में शेष उपभोक्ताओं का ई-केवाईसी पूर्ण कराने का भी निर्देश दिया है, ताकि उपभोक्ताओं को ओटीपी प्राप्त करने में किसी प्रकार की परेशानी न हो। उपभोक्ता स्वयं भी ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इस दौरान अनुमंडल पदाधिकारी बक्सर एवं डुमरांव द्वारा लगातार क्षेत्र में भ्रमण कर वितरण व्यवस्था की निगरानी की जा रही है, जबकि जिला आपूर्ति पदाधिकारी द्वारा एजेंसियों के साथ नियमित बैठक कर आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है।

































































































