पांच टैम्पो और दो हजार, हो गया बाजार

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बक्सर खबर। पुरानी कहावत है। कमाने वाले तो लहर गिन कर कमा लें। ऐसा ही आज कल पुलिस चौकी पर होता है। वहां एक मिला ऐसा पुलिस वाला है। जो रोज ही कम से कम पांच टैम्पो वालों को पकड़ता है। पुलिस वाले को कौन बोले। वे ऐसे ही आटो रिक्शा वालों को अपना शिकार बनाते हैं। जो कमजोर या नाबालिग हों। गाड़ी रुकते ही उनकी चाभी छीन ली जाती है। चालान भी नहीं कटता क्योंकि यह सब अवैध तरीके से जो होता है। तय जगह पर आने का कहा जाता है। वहां बैठे एक व्यक्ति को चार सौ रुपये दो फिर अपनी टैम्पो की चाभी पाओ। यह रोज का कारोबार है।

शिकायत करने वाले बताते हैं तीन माह पहले इस तरह के खेल की सूचना सदर डीएसपी को दी गई थी। बावजूद यहां अंगद की पांव की तरह जमे वसूली करने वाले पुलिस वाले को कोई रोकने वाला नहीं। उसे न तो मीडिया का भय है न वरीय पुलिस पदाधिकारियों का। बड़े साहब की कुर्सी तो अंदर कमरे में लगती है। वह तो बाहर चौक पर ही अपनी कुर्सी लगाए बैठा रहता है। इतना ही नहीं उसने अपना बाउॅसर भी बहाल कर रखा है। जो पीछे-पीछे लेनदेन का कलेक्शन करता है। अर्थात दरोगा जी का पॉकेट भी गर्म और हाथ भी मैला नहीं। क्या कर लेगा कोई, झेले टैम्पो वाले। लेकिन उसकी आमदनी के चर्चे बहुत हैं। अगर घंटे भर में दो हजार कमाएगा तो न जाने कितना कमाएगा।

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