शिक्षा विभाग में बड़ा खुलासा: निलंबित लिपिक को गलत तरीके से छुट्टी देने का मामला उजागर

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जिला शिक्षा पदाधिकारी को दिए गए रिकवरी के सख्त निर्देश                                                                    बक्सर खबर। शिक्षा विभाग में नियमों को दरकिनार कर अवकाश स्वीकृत करने और वित्तीय लाभ देने के मामले में बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक, पटना प्रमंडल ने जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय, बक्सर के निलंबित लिपिक भालचन्द्र शर्मा से जुड़े दो महत्वपूर्ण आदेशों में संशोधन करते हुए अतिरिक्त भुगतान की गई राशि की वसूली का निर्देश दिया है। जांच में सामने आया कि स्थानांतरण के बाद योगदान नहीं देने की अवधि के लिए भालचन्द्र शर्मा को निर्धारित सीमा से कहीं अधिक अवकाश स्वीकृत कर दिया गया था। इसी आधार पर उन्हें वेतन का भुगतान भी किया गया था।

शिकायत मिलने पर सेवा पुस्तिका और अवकाश अभिलेखों की जांच कराई गई। जांच में पाया गया कि उनके खाते में केवल 164 दिन अर्जित अवकाश और 80 दिन रूपांतरित अवकाश ही उपलब्ध था। इसके बावजूद 300 दिन अर्जित अवकाश और 120 दिन रूपांतरित अवकाश स्वीकृत कर दिया गया था। संशोधित आदेश के अनुसार अब उन्हें 15 फरवरी 2012 से 27 जुलाई 2012 तक 164 दिन अर्जित अवकाश, 28 जुलाई 2012 से 15 अक्टूबर 2012 तक 80 दिन अर्द्ध वेतन पर रूपांतरित अवकाश तथा 16 अक्टूबर 2012 से 2 नवंबर 2013 तक 383 दिन असाधारण अवकाश स्वीकृत माना जाएगा। इसी मामले की समीक्षा के दौरान भालचन्द्र शर्मा को पूर्व में दिए गए प्रथम और द्वितीय एमएसीपी लाभ में भी संशोधन किया गया है। नए आदेश के अनुसार उनकी नियुक्ति तिथि 26 फरवरी 2004 मानते हुए प्रथम एमएसीपी का लाभ अब 15 मई 2015 से तथा द्वितीय एमएसीपी का लाभ 15 मई 2025 से देय माना जाएगा।

क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक राज कुमार ने जिला शिक्षा पदाधिकारी, बक्सर को निर्देश दिया है कि संशोधित आदेशों के आधार पर वेतन का पुनर्निर्धारण किया जाए। साथ ही अवकाश और एमएसीपी के कारण हुए अतिरिक्त भुगतान की गणना कर उसकी शत-प्रतिशत वसूली सुनिश्चित की जाए। दोनों आदेशों की प्रतिलिपि बक्सर और रोहतास के संबंधित अधिकारियों तथा कोषागार को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी गई है।

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