निजी स्कूल संचालकों ने शिक्षा मंत्री को गिनाईं व्यावहारिक कठिनाइयां 

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शिक्षा संवाद में नामांकन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की उठी मांग, नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन और विद्यालयों से जुड़े प्रशासनिक मुद्दों पर हुई चर्चा                                                                             बक्सर खबर। निजी विद्यालयों की समस्याओं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर गुरुवार को शहर के वैष्णवी होटल में शिक्षा संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वावधान में किया गया, जिसमें बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। संवाद कार्यक्रम में जिले के निबंधित, गैर-निबंधित तथा संबद्धता प्राप्त निजी विद्यालयों के प्रबंधक और प्राचार्यों ने भाग लिया। इस दौरान विद्यालय संचालकों ने शिक्षा मंत्री के समक्ष अपनी समस्याएं और सुझाव रखे। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप पाठक ने कहा कि निजी विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन उन्हें कई व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार में साक्षरता दर बढ़ाने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए निजी क्षेत्र को अधिक सहयोग और स्वतंत्रता देने की आवश्यकता है। संवाद के दौरान नई शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन में पोर्टल प्रविष्टि और तकनीकी समस्याओं के समाधान की मांग उठाई गई। साथ ही शिक्षा का अधिकार के तहत नि:शुल्क पढ़ाए जा रहे बच्चों की प्रतिपूर्ति राशि का शीघ्र भुगतान करने की मांग भी की गई।

बिरला ओपन माइंड विद्यालय के निदेशक अंकुर राय ने आरटीई नामांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यावहारिक बनाने के लिए सुझाव दिए। वहीं विद्यालय संचालकों ने प्रशासन द्वारा जारी होने वाले निर्देशों में निजी विद्यालय संगठन की सलाहकारी भूमिका सुनिश्चित करने की मांग रखी। वक्ताओं ने कहा कि कई बार प्रशासनिक आदेश अचानक जारी होने से ग्रामीण क्षेत्रों तक सूचना समय पर नहीं पहुंच पाती, जिससे अभिभावकों और विद्यालय कर्मियों को परेशानी होती है। कार्यक्रम में डॉ. प्रदीप पाठक और डॉ. मोहन चौबे ने विभिन्न शैक्षणिक मुद्दों पर विस्तार से विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन भारत प्रसाद ने किया। उन्होंने सभी विद्यालय संचालकों से संगठन की बैठकों में सक्रिय भागीदारी की अपील की।कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री को शॉल, पुष्पगुच्छ, पुस्तक और स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में निजी विद्यालयों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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