कागजों में बढ़ी मजदूरी, जमीन पर पसरी गंदगी, शहर बेहाल

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नगर प्रशासन के खिलाफ सफाई कर्मियों ने खोला मोर्चा, 528 रुपये के वादे पर भारी पड़ा 300 का भुगतान,अपनी मांगों पर अड़े सफाईकर्मी                                         बक्सर खबर। नगर परिषद क्षेत्र में सफाई व्यवस्था मंगलवार से पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। एनजीओ के अधीन कार्यरत सफाई मित्र और सुपरवाइजर नए दैनिक मजदूरी की मांग को लेकर सड़क पर उतर आए हैं। दूसरे दिन बुधवार को भी कर्मियों ने मेन रोड स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर के समीप एकत्र होकर नगर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सफाई कार्य ठप होने से शहर की सड़कें और गलियां कचरे से बजबजा उठी हैं। खासकर रामरेखा घाट पर मुंडन संस्कार के लिए सुबह से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।

प्रशासन ने पहले से यातायात व्यवस्था बदलते हुए भारी वाहनों का प्रवेश शहर में प्रतिबंधित कर दिया है। गोलंबर के पास वाहनों को रोका जा रहा है, जिससे श्रद्धालु पैदल ही मेन रोड, थाना रोड और पीपी रोड होते हुए घाट तक पहुंच रहे हैं। गंदगी के ढेर के बीच आस्था की रस्म अदा करने को मजबूर लोग नगर प्रशासन की कुव्यवस्था पर तीखी टिप्पणी कर रहे हैं। दैनिक सफाई मजदूरों का कहना है कि 12 दिसंबर को पत्रांक-6303 के तहत जनवरी से न्यूनतम मजदूरी 428 रुपये में 100 रुपये की वृद्धि कर 528 रुपये प्रतिदिन भुगतान का लिखित आदेश जारी हुआ था। साथ ही प्रत्येक माह की 7 तारीख तक भुगतान और ईपीएफ-ईएसआईसी कार्ड उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था।

फोटो – गंदगी के बीच रामरेखा घाट पैदल जाते श्रद्धालु

इसके बावजूद 18 फरवरी तक कई कर्मियों को पुराने दर पर ही 300, 350 और 400 रुपये का भुगतान किया गया है। मजदूर नेता सह भाकपा माले नेता संजय शर्मा ने आरोप लगाया कि समान काम का समान वेतन की मांग लंबे समय से लंबित है और प्रशासन वादा निभाने में विफल रहा है। वहीं स्थायी सशक्त समिति सदस्य इंद्र प्रताप सिंह ने इसे पदाधिकारी की त्रुटि बताते हुए कहा कि रेट वृद्धि का कोई प्रावधान नहीं है, हालांकि मजदूरों से वार्ता जारी है। हड़ताल के कारण शहर की सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। दूसरे चरण की वार्ता बुधवार को प्रस्तावित है। अब देखना है कि प्रशासन और मजदूरों के बीच सहमति बनती है या आंदोलन और तेज होता है। फिलहाल, शहर गंदगी और प्रशासनिक असमंजस के बीच जूझ रहा है।

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