पत्रकारिता सत्ता को आरती दिखाने के लिए नहीं : रामेश्वर वर्मा

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बक्सर खबर : जिले के इकलौते दीर्घजीवी पत्रकार हैं रामेश्वर प्रसाद वर्मा। पिछले चालीस वर्षो से वे लगातार पत्रकारिता जीवन में सक्रिय हैं। बहुत से बदलाव देखे हैं। जीवन में सुख-दुख को उन्होंने जितना झेला है। शायद कम ही पत्रकारों ने देखा हो। पत्रकारिता व पत्रकार विषय पर बक्सर खबर से उनकी लंबी बातचीत हुई। संविधान सभा के पहले कार्यकारी अध्यक्ष डा. सच्चिदानंद सिन्हा व जिले के महान साहित्यकार शिवपुजन सहाय जी के दर्शन का उनको सौभाग्य मिला है। वे दोनों भी पत्रकार थे। वर्मा जी को कुरेदने पर कई अनमोल, यादगार व अनुभव से भरी बातें जानने को मिली। पत्रकारिता के आदर्शों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा साथियों को मैं सलाह दूंगा। यह क्षेत्र कमाई का जरिया नहीं। हमेशा संयमित, मर्यादित आचरण रखना चाहिए। नहीं तो पत्रकारिता पर आंच आएगी। मीडिया की कलम पर लोगों को अटूट विश्वास हुआ करता है। इस लिए सच्चाई को जानने का प्रयास करना चाहिए। अपने लाभ के लिए नहीं, समाज के हित व राष्ट्र के लिए लिखना चाहिए।

देश के महान पत्रकार व साहित्यकार रामधारी सिंह दिनकर जी ने कहा है। राजनीति जब फिसलकर गिरने लगती है तो पत्रकारिता ही उसे संभालती है। हमें सत्ता व अधिकारियों के पीछे नहीं भागना चाहिए। मुझे याद है पारसनाथ जी आज दैनिक के संपादक हुआ करते थे। देश व बिहार के नेता ललाइत रहते थे। उनका साक्षात्कार पारस जी करें। पर किसी के यहां नहीं जाते। किसी का बुलावा आता वे किसी ने किसी को भेज देते। उन दिनों विंदेश्वरी दुबे जी बिहार के मुख्यमंत्री थे। उन्होंने पारस जी को फोन किया। वे नहीं गए, किसी प्रधान संवाददाता को भेज दिया। दुबे जी ने कहा नहीं मुझे आपसे बात करनी है। पारस जी ने कहा मैं समाचार पत्र के कार्यालय में बैठता हूं। मुख्यमंत्री स्वयं उनसे मिलने पहुंचे। उन आदर्शवादी लोगों की वजह से आज मीडिया को समाज में इज्जत मिलती है। हमने (बक्सर खबर ) उनको रोका, प्रश्न किया। मौजूदा लोगों को आप क्या कहना चाहेंगे? वर्मा जी ने कहा दुख होता है जब पत्रकार किसी नेता व अधिकारी के पीछे भागते दिखते हैं। मेरा यही कहना है-पत्रकार सत्ता को आरती नहीं दिखाएं। उनकी बातें सुन रोंगटे खड़े हो गए। हम कहां है, अपनी जमीन तलाशने पर मजबूर दिखे। बहरहाल अपने साप्ताहिक कालम इनसे मिलिए के लिए जो बातचीत हुई। प्रस्तुत है उसके शेष अंश –
पवित्र पेशा है, इसे धंधा न बनाएं : वर्मा जी
बक्सर : जिले में पत्रकारिता के आदर्श रहे वर्मा जी ने सबसे पहले अपने गुरु अनुग्रह नारायण सिन्हा जी का नाम लिया। वे सर्चलाइट के संपादक हुआ करते थे। उन्हीं के सानिध्य में पत्रकारिता की शुरुआत की। वर्मा जी कहते हैं मैं आज भी अपने आप को पत्रकार मानता हूं। विभिन्न पत्रिकाओं व आकाशवाणी को अपने लेख, कहानियां भेजा करता हूं। उनका प्रसारण होता है। वर्मा जी ने बताया अली अनवर जो आज राज्य सभा के सांसद हैं। उनको आज अखबार के लिए पहली दफा मैंने ही लिखने के लिए प्रेरित किया। तब से मुफस्सिल पत्रकार थे। आज जिले के ऐसे इकलौते पत्रकार हैं। जो राज्यसभा के सांसद हैं। मैंने बहुत से लोगों के साथ काम किया। सभी ने यही सीख दी, बहुत ही पवित्र पेशा है। इससे धंधा न बनाए। आज तो बहुत से समाचार माध्यम हैं। पत्रकार हर जगह मिल जाते हैं। मैं सभी का आदर करता हूं। उम्मीद रखता हूं। नई पीढ़ी अपने पेशे को और शोहरत बख्से।
पत्रकारिता जीवन
बक्सर : 1969 में वर्मा जी का जुड़ाव आज समाचार पत्र वाराणसी से हुआ। मार्च महीने से उन्होंने लिखना शुरु किया। इसी बीच आज दैनिक का प्रकाशन पटना से होने लगा। 1970 में यहां का संवाददाता बना। 90 तक लगातार आज समाचार पत्र के लिए लिखता रहा। पुन: आर्यावर्त पटना से जुड़ा। इस बीच भरत युग, साप्ताहिक हिन्दुस्तान समाचार एजेंसी, के लिए काम करने लगा। 1991 में बक्सर जिला बना। तब मैं आकाशवाणी के लिए जिले की चिट्ठी लिखने लगा। यह क्रम 2002 तक चला। राज्य के मंत्री रहे पंडित जगनरायण त्रिवेदी की प्रेरणा व सहयोग से मासिक पत्रिका निष्पक्ष का संपादन व प्रकाशन शुरु किया। जो 11 वर्ष तक चली। इस बीच पटना से प्रकाशित होने वाली पत्रिका पहुंच के संपादन का मौका मिला। 92 से 97 तक वह कार्य भी किया। जिले में प्रकाशित होने वाली विभिन्न स्मारिका संपादन किया। जिसमें प्रथम डीएम दीपक कुमार की पहल पर बक्सर 1992 स्मारिका छपी। जिसकी खूब चर्चा रही। इसी बीच बक्सर में सीटी न्यूज बक्सर की शुरुआत हुई। उसके लिए भी कई वर्षों तक न्यूज एंकर का काम किया।
लिखी है कई पुस्तकें व कहानियां
बक्सर : रामेश्वर प्रसाद वर्मा पत्रकारिता के साथ साहित्य में भी रुचि रखते हैं। 1965 में उनका पहला संकलन बिखरे फूल प्रकाशित हुआ। 1970 में कहानी व कविता संग्रह मलयज प्रकाशित हुई। 1982 में संकल्प तथा 1985 में उपन्यास जिंदगी प्रकाशित हुआ। आज भी वे आर्य समाज की पाक्षिक पत्रिका मनुर्भव के संपादक हैं।
व्यक्तिगत जीवन
बक्सर : रामेश्वर प्रसाद वर्मा नगर के सिविल लाइन मुहल्ले में रहते हैं। इनका जन्म 4.2.1942 को कैलाश बिहारी वर्मा के पुत्र के रुप में हुआ। पिता सरकारी नौकरी में थे। उनके साथ बचपन के कुछ दिन कोलकत्ता में गुजरे। फिर बिहार के धनबाद चले आए। वहां 1957 में मैट्रिक किया। जैन कालेज आरा से इंटर की परीक्षा पास की। 1963 में एमवी कालेज से स्नातक किया। महाराजा कालेज आरा से 1968 में ला की डिग्री ली। इस बीच वे एमपी हाई स्कूल में दो वर्ष तथा नेहरु स्मारक हाई स्कूल के प्रथम हेडमास्टर के रुप में भी बच्चों को पढ़ा चुके हैं। वर्मा जी 2006 में बने बक्सर पत्रकार संघ के प्रथम संरक्षक बने। आज भी वे संघ के इस पद पर कार्यरत हैं।

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