बक्सर खबर। चुनावी ड्यूटी बजाने के लिए जिले की सीमा पर कुछ जगह चेकपोस्ट बने हैं। जिनकी जिम्मेवारी वाहनों की जांच और गैर कानूनी कार्यो पर नजर रखना है। लेकिन इन चेकपोस्टों का हाल क्या है। यह किसी से छिपा नहीं है। यह सिर्फ नाम के हैं या काम के। यह कहना मुश्किल है। क्योंकि यहां से गुजरने वाले छोटे वाहनों की जांच तो कभी कभार हो जाती है। लेकिन, बड़े वाहनों पर किसी की नजर नहीं है। सबकी आंखों के सामने से ओवर लोड बालू के ट्रक गुजरते हैं। लेकिन प्रशासन का क्या।

अब तो सारे के सारे निर्वाचन आयोग के कर्मचारी हैं। और आयोग तो पूरी तरह स्वतंत्र है। निष्पक्ष चुनाव जो होना है। यह तो हो गए सवाल। लेकिन, मौके पर पहुंचने के बाद पता चलता है कि वहां का क्या है हाल। न सर पर छत है न बैठने की व्यवस्था। पानी और कुर्सी की कौन कहे। लगा बैरियर भी पेड़ के सहारे झूल रहा है। एक सूत्र ने बताया कौन व्यवस्था करे। कहां से करे, निर्वाचन का पैसा जिले में पड़ा है। किसी को आवंटन नहीं मिल रहा। साहब लोग बक्सर में बैठते हैं, वहीं लोग बताएंगे। कहां क्या हो रहा है।