प्रसाद स्वरुप सत्तु का प्रसाद वितरित करते पंचकोशी समिति के सदस्य

बक्सर खबर : पंचकोश का मेला शनिवार को बड़का नुआंव गांव में लगा। नया बाजार मठिया मोड़ से सटे नुआंव गांव की तरफ जाने वाले रास्ते पर शुक्रवार से ही चहल पहल देखी गई। नुआंव गांव में पंचकोश मेले का चौथा पड़ाव लगता है। ऐसा बताया जाता है। उद्दालक मुनी का आश्रम यहां हुआ करता था। उनके आश्रम में ही माता अंजनी रहती थी।

प्रसाद ग्रहण करती महिलाएं

मां के साथ बाल हनुमान यहां कभी विराजते थे। आश्रम के पास एक सरोवर था। जिसका नाम अंजनी सरोवर पड़ा। आज भी श्रद्धालु वहां जाते हैं। गांव वालों ने वहां माता अंजनी का मंदिर भी बनवाया है। जहां श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। सरोवर के आस-पास मेला भी लगा था। जहां बच्चों ने खूब मजे किए। वहां पहुंची पंचकोशी परिक्रमा समिति के संतो ने अंजनी सरोवर की परिक्रमा की।

मांता अंजनी की पूजा करती महिलाए

बड़ी संख्या में यहां श्रद्धालु पहुंचे थे। यहां महिलाओं और दूर से आए परिवारों ने खिचड़ी बना प्रसाद स्वरुप ग्रहण किया। वहीं आयोजन समिति ने पूर्व की मान्यता के अनुसार लोगों के बीच सत्त़ व मूल का वितरण किया। ऐसी मान्यता है कि यहां भगवान राम ने सत्तु व मुली खाई थी।

मेले में मस्ती करते बच्चे

इसके उपरांत लोग पंचकोशी के अंतिम पड़ाव चरित्रवन की तरफ रवाना हो गए। शाम से ही शहर के चरित्रवन का इलाका लोगों से पटने लगा। जगह-जगह बैगन, उपले, आटा व सत्तु की दुकानें सजी नजर आ रहीं हैं। पारंपरिक मेले का आनंद क्या होता है। इसका नजारा देखते बन रहा है।

अंजनी सरोवर की परिक्रमा करते संत महात्मा