अंचल में फर्जीवाड़ा : कर्मचारी के गले पर कार्रवाई की तलवार

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-करे कोई भरे कोई की वर्षो पुरानी परंपरा रही कायम
बक्सर खबर। अंचल कार्यालय में भूमि की जमाबंदी से लेकर दाखिल खारिज तक में घपले बाजी का खेल चलता है। कभी कर्मचारी खेल करते हैं। कभी सीओ के स्तर से ऐसी गड़बड़ी होती है। फिलहाल ऐसी की एक शिकायत सामने आई है। जिसमें गलत जमाबंदी की गई। आरोप सीओ पर लगा। लेकिन, जांच अधिकारियों ने इसके लिए कर्मचारी को दोषी करार दिया। नतीजा यह हुआ कि अंचल कर्मी कृष्णमुरारी ओझा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू हो गई है। उनके खिलाफ प्रपत्र क भरकर कार्मिक को भेज दिया गया है।

यह प्रकरण सदर अंचल कार्यालय का है। हुआ कुछ यूं कि शिकायत कर्ता त्रिलोकी प्रसाद यादव मठिया मोहल्ला, शिवपुरी ने लोक शिकायत कोषांग में आवेदन दाखिल किया। अंचल कार्यालय से गलत जमाबंदी कर दी गई है। उसकी रशीद नेट पर अपलोड है। शिकायत कर्ता ने उसकी प्रति निकाली और साक्ष्य के तौर पर उसे प्रस्तुत किया। बगैर कागजात के हुई इस जमाबंदी में गड़बड़ी पकड़ी गई। तुरंत ही उसे रद्द कर दिया गया। लेकिन, इसके खिलाफ शिकायत कर्ता ने प्रमंडिल आयुक्त के यहां शिकायत कर दी। वहां से जांच आई तो आनन-फानन में 29 सितम्बर को जवाब भेजा गया। इसके लिए कर्मचारी दोषी है। उसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। आरोप गठित कर पपत्र भर दिया गया है।

एक तरफ चुनावी तैयारी चल रही थी। दूसरी तरफ आयुक्त के कार्यालय से 15 अक्टूबर को पत्र जारी हुआ। जिसमें शिकायत कर्ता को सूचित किया गया। आपके वाद का निष्पादन कर दिया गया है। साथ ही दोषी कर्मचारी कृष्णमुरारी ओझा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है। यह हाल है अंचल कार्यालय का। वैसे सूत्रों की माने तो साक्ष्य के अभाव में मुरारी ओझा बरी हो जाएंगे। क्योंकि उनका दस्तावेजों पर हस्ताक्षर नहीं है। लेकिन, विभागीय स्तर पर हो रहे गोरखधंधे की पोल खोलने वाली यह शिकायत दूसरे कर्मचारियों के लिए सीख है।

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