बक्सर खबर : फागुन मास की महाशिवरात्रि 13 फरवरी को मनाई जाएगी। इस व्रत को लेकर कुछ लोग उहापोह में हैं। लेकिन व्रत विधान और तिथि के अनुसार इसे तेरह को ही मनाया जाना श्रेयकर है। दुविधा में पड़े लोग यह जान लें। व्रत किसी तिथि को मनाया जाए। पूजन किस तिथि को किया जाए। बक्सर खबर ने इस सिलसिले में पंडित नरोत्तम द्विवेदी बता की। वे बताते हैं व्रत करने वाले लोग मंगलवार को ही उपवास करें। क्योंकि 14 की रात्रि में ही शिवरात्रि का पुण्य काल समाप्त हो जाएगा। वैसे पूजन अथवा रुद्राभिषेक करने वाले लोग चौदह को भी पूजा अर्चना कर सकते हैं। नरोत्तम द्विवेदी ने प्रमाण देते हुए कहा।

शिवरात्रिव्रत के विषय मे शास्त्रों मे तीन पक्ष मिलता है। 1-चतुर्दशी को प्रदोष व्यापिनी, 2-निशीथ(अर्धरात्रि)-व्यापिनी एवं 3-उभय व्यापिनी। व्रतराज, निर्णयसिन्धु तथा धर्मसिन्धु आदि ग्रन्थों के अनुसार निशीथ व्यापिनी चतुर्दशी तिथि को ही व्रतादि का विधान बतलाया गया है। इस वर्ष 51 साल बाद दोनों दिन चतुर्दशी तिथि मिल रही है। दिनांक-13-02-18 को रात्रि 10:22pm से चतुर्दशी तिथि शुरु होकर दिनांक-14-02-18 को रात्रि12:17am तक हैं। अतःदोनो दिन निशीथ काल मे चतुर्दशी तिथि प्राप्त हो रही है।

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चूँकि शिवरात्रिव्रत का पारण चतुर्दशी तिथि में ही करना होता है। अतःसर्वोत्तम फल प्राप्ति हेतु 13को व्रत रखे और शिवरात्रि पूजन उत्सव अभिषेक 14को सर्वोत्तम फल कारक होगा। “अधिकस्य अधिकं फलम्” सिद्धांत के अनुसार यही सर्वोत्तम होगा। 13को व्रत करने वाले 14 को शिवपूजन करके पारण करें। 13कोप्रदोष भी है। इस नियमानुसार अहोरात्र व्रत मिल जायेगा। 14को व्रत रखने पर रात्रि मे ही12:17 से पहले पारण की विवशता होगी। इस प्रकार स्पष्ट हो जाता हैं, कि उत्तम और सर्वोत्तम मे सर्वोत्तम का चयन व्रती एवं उत्सवी करे।