बक्सर खबर : नावानगर प्रखंड वासी विनोद मिश्रा दैनिक जागरण के पत्रकार हैं। वे कलम के जादूगर नहीं पर मिजाज के धनी हैं। बचपन से अनेक उतार-चढ़ाव देखने वाले विनोद जीवट व्यक्ति हैं। ग्रामीण परिवेश में रहने के कारण उन्होंने कभी शहर की तरफ आने का रुख नहीं किया। जहां और जिस हालत में हैं। जीवन को चलाए जा रहे हैं। अपने साप्ताहिक कालम इनसे मिलिए के लिए बक्सर खबर ने उनसे बात की। विनोद ने उन दिनों के याद करते हुए कहा। दिन हो या रात दैनिक जागरण की टीम कहीं भी और कभी भी पहुंच जाती थी। कलम की हनक इतनी थी। पत्रकार को देखते ही थानेदार से लेकर अधिकारी तक आदर के साथ कुर्सी छोड़ खड़े हो जाते थे। मैंने यही सीखा है। पत्रकार अगर सच्चा हो तो उसके सामने बोलते वक्त लोग संभलकर शब्दों का प्रयोग करते हैं। प्रस्तुत है मिश्रा जी से हुई बातचीत के अंश।

पत्रकारिता जीवन
बक्सर : विनोद बाते हैं। वर्ष 2005 में दैनिक जागरण से जुड़े। तब मैं नावानगर में रहकर स्कूल चलाया करता था। कुछ समय तक दोनों काम साथ-साथ चलता रहा। हम लोग दिन-रात काम करने में नहीं थकते थे। दिन में दिनदहाड़े और रात में जागते रहे। अभियान चलाते थे। प्रशासनिक अधिकारी से लेकर पुलिस वाले खौफ खाते थे। इसका असर था सिर्फ दैनिक जागरण नहीं हर पत्रकार की समाज में अलग छवि थी। उस समय राजकमल भैया जागरण के प्रभारी हुआ करते थे। आज भी कंचन जी हैं। जिनके साथ काम करने का मौका हमें मिल रहा है।

व्यक्तिगत जीवन
बक्सर : विनोद मिश्रा का जन्म 22 सितम्बर 1967 को अवध कुमार मिश्र के घर हुआ। पिता जी नावानगर में प्रखंड कृषि पदाधिकारी हुआ करते थे। 1983 में नावानगर से ही मैट्रिक की परीक्षा पास की। 85 में इंटर और 88 में स्नातक की परीक्षा पास की। पिता के साथ नावानगर में ही रहने के कारण अब वे नावानगर के ही हो कर रह गए। आज वे तीन बच्चों के पिता हैं।

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