बक्सर खबर। पिछले कुछ दिनों से सरकारी अस्पताल में कार्यरत डाटा आपरेटर हड़ताल पर हैं। इस वजह से अस्पताल के माध्यम से होने वाले अनेक कार्य रुक गए हैं और कुछ प्रभावित हो रहे हैं। जैसे दवा का वितरण, मरीजों का पंजीयन, आयुष्मान भारत योजना के तहत बनने वाले कार्ड, खसरा-रुबेला का टिकाकरण अभियान सब कुछ प्रभावित हो रहा है। अस्पताल प्रबंधन मामले को सुलझाने की बजाय आपरेटरों को डराने-धमकाने में जुटा है। धरने पर बैठे जिले भर के लगभग 43 डाटा आपरेटर अपने वेतन और अन्य सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।

उनका कहना है सभी को मिलने वाला मानदेय पिछले 8 माह से लेकर कहीं-कहीं एक वर्ष तक बकाया है। ऐसे में काम कर पाना कहां संभव है। इस वजह से उन्हें अनिश्चित कालीन हड़ताल पर जाना पड़ा है। उनका भुगतान सिविल सर्जन कार्यालय से ही होना है। बावजूद इसके यहां मनमानी चरम पर है। धरनार्थियों ने बताया हमारी मांग को जायज तरीके से अस्पताल प्रबंधन जिलाधिकारी तक नहीं पहुंचा रहा है। सूचना तो यह भी मिली है कि जिलाधिकारी को गलत जानकारी दी जा रही है। सच जो भी अगर किसी भी विभाग में काम करने वाले कर्मी को आठ माह से वेतन नहीं मिलेगा तो वह क्या करेगा? इस विषय पर जिले में बैठे बड़े अधिकारियों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।