बचानी होगी पत्रकारिता की शाख : ओंकार नाथ मिश्रा

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बक्सर खबर : पत्रकारिता एक पवित्र पेशा है। जिसतरह मंदिर के पुजारी का आचरण उत्तम होना चाहिए। उसी तरह पत्रकार को भी स्वच्छ व निर्भिक व्यक्तित्व का होना चाहिए। उच्च आदर्श व हमेशा लगन शिल रहना ही सच्ची पत्रकारिता का आधार है। यह बातें कहते हैं ओंकार नाथ मिश्र। दूबली काया व छोटा कद होने के बावजूद मिश्रा विराट सोच वाले पत्रकार हैं। हमेशा संतुलित लेखन पर उनका ध्यान रहता है। अपने पेशे के प्रति उनकी सच्ची निष्ठा है जो अलग पहचान बनाए हुए हैं। अपने साप्ताहिक काल इनसे मिलिए (प्रत्येक रविवार)के लिए बक्सर खबर ने उनसे बात की। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश।

बिकाउ हो गई है पत्रकारिता
बक्सर : आज की पत्रकारिता बिकाउ हो गई है। इसकी वजह मजबूरी है। कम लागत पर पत्रकार बहाल करने का प्रचलन सभी मीडिया हाउस में है। मुनाफा अधिक हो, खर्च कम हो ऐसे में कलम उन हाथों में चली गई। जो उसके काबिल नहीं। इसका सबसे बुरा प्रभाव यह रहा कि पत्रकारिता में कमाओ खाओ वाले लोग हावी हो गए। उनके साथ वैसे भी लोग बदनाम हुए। जो आदर्शों को बचाकर चलते रहे। एक दौर आया जब यहां की पत्रकारिता में राजकमल राय दैनिक जागरण के प्रभारी बनकर आए। हमने ही नहीं पूरे जिले ने पत्रकारिता का तेवर क्या होता है यह देखा। अखबार की छवि बदली और पत्रकारों का कद भी बढ़ा। जरुरत है वैसे लोगों की जिनके साथ काम करने वाले अपने आप को मजबूत समझे कमजोर नहीं। ऐसा नहीं तेवर में रहने वाले को खतरा रहता है। जो संतुलन बनाकर चलते हैं। उनको कोई परेशानी नहीं होती।
पत्रकारिता जीवन
बक्सर : वर्ष 2003 में आज समाचार पत्र से पत्रकारिता की शुरुआत की। उनको इससे जोडऩे वाले पत्रकार हैं बबलु उपाध्याय। ओंकार मिश्रा उस अखबार में कुछ माह तक रहे। फिर 2004 में दैनिक जागरण से जुड़े। जय मंगल पांडेय ने उन्हें इस अखबार से जोड़ा। इसी बीच दैनिक जागरण में राजकमल राय का आगमन हुआ। मिश्रा जी को प्रखंड से हटाकर जिला मुख्यालय में महत्वपूर्ण जिम्मेवारी दी गई। इस बीच वर्ष 2016 में हिन्दुस्तान अखबार से बुलावा आया। वेतन अच्छा मिला तो मिश्रा जी सबकी सहमति से वहां चले गए। उन्होंने बक्सर खबर से कहा आज तक मेरा कोई विरोधी नहीं रहा। मैंने सभी को सम्मान दिया। मुझे भी सबका स्नेह मिलता है।
व्यक्तिगत जीवन
बक्सर : ओंकार नाथ मिश्रा का जन्म 10.05.1973 को इटाढ़ी प्रखंड के जिगिना गांव में हुआ। पंडित श्री हरेराम मिश्रा के तीन पुत्रों में आप सबसे बड़े हैं। गांव के समीप स्थित डाफाडेहरी हाई स्कूल से मैट्रिक पास कर एमवी कालेज बक्सर में पढऩे चले आए यहां 1996 में स्नातक पास किया। छात्र जीवन में उन्होंने एनएसयूआई का हाथ थामा और महासचिव भी रहे। जमकर आंदोलन में हिस्सा लिया। राजनीतिक कद बढ़ता चला गया। शिक्षा छूटी तो युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष बने। यह सफर पत्रकारिता की जिम्मेवारी मिलने के बाद समाप्त सा हो गया।

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