पुलिस

सबसे ज्यादा वीआईपी और वीवीआईपी हैं यहां, सरकार खजाने से डेढ़ सौ करोड़ हर साल फूंकती है इनकी सुरक्षा पर

बक्सर खबर(नेशनल डेस्क)। यूं तो प्रदेश में सुशासन का एक तरह से हो-हल्ला है, पर धरातल पर जो हालात हैं, वे सुशासन की पोल खोलने वाले हैं। आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि सरकार को जनता से ज्यादा यहां के वीआईपी और वीवीआईपी की चिंता है। मजा यह कि इनकी संख्या देश भर में सबसे ज्यादा अपने ही सूबे में है। पिछले साल बिहार सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में एक हलफनामा दायर कर बताया था कि बिहार में 3,591 ऐसे वीआईपी हैं जिनकी सुरक्षा वह अपने खर्च पर करती है। इनकी सुरक्षा में बिहार पुलिस ने अपने कुल जवानों का 12 फीसदी लगा रखी है। इन पर सरकार को प्रतिवर्ष 141.95 करोड़ खर्च करना पड़ता है।

इस बीच केंद्रीय गृहमंत्रालय की इकाई ‘ब्यूरो आफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंटÓ की ताजा रिपोर्ट यह बताती है कि बिहार में देश की राजधानी दिल्ली और सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश से भी ज्यादा वीआईपी रहते हैं। राजधानी दिल्ली में 489 वीआईपी हैं। इनकी सुरक्षा में 7420 पुलिस वाले लगे हैं। वहीं उत्तर प्रदेश में कुल वीआईपी बिहार के आधा यानी 1852 हैं। इनकी सुरक्षा में महज 4681 पुलिस वाले लगे हैं। जबकि केंद्रीय गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार बिहार में कुल 70 हजार के करीब पुलिस वाले हैं। इनमें से लगभग 12 हजार वीआईपी की सुरक्षा में लगे हैं। सिद्धांत रूप में देश में 554 लोगों पर एक पुलिस वाले की जरूरत है, लेकिन देश में यह औसत 729 लोगों पर एक पुलिस वाले की है। अब जरा बिहार पर नजर डाल लें। यहां 1454 लोगों की सुरक्षा एक पुलिस वाले के जिम्मे है। ये आंकड़े सुशासन की हवा नहीं निकाल देते क्या? स्वयं डीजीपी केएस द्विवेदी भी इसे स्वीकार करते हैं। उनका कहना है कि वीआईपी सुरक्षा में लगे जवानों के चलते विधि व्यवस्था और आपराधिक घटनाओं की जांच पर असर पड़ता है।

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