बक्सर खबर। सिद्धाश्रम वह भूमि है। जहां देवताओं का भी उद्धार हुआ है। हम सभी को इस पर गर्व है। शास्त्र बताते हैं यह वह भूमि है जिसने देवताओं को देवता बनाया। अर्थात जब देवताओं को भी जब महापाप के दोषी बने तो यहीं आकर उनका उद्धार हुआ। महान तपस्वी संत पूज्य जीयर स्वामी जी महाराज ने यह उपदेश शुक्रवार को अपनी कथा के दौरान दिए। भागवत कथा के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा इन्द्र को ब्रह्म हत्या का पाप लगा। हुआ कुछ यूं की एक बार गुरु वृहस्पति के नहीं होने पर ऋषि त्वष्टा के पुत्र कृष्णरुप को देवताओं ने अपना गुरु बनाया। बाद में इंन्द्र ने उनकी हत्या कर दी।

उन्हें ब्रह्महत्या का दोष लगा। जिससे मुक्ति के लिए उन्हें बक्सर में आकर तपस्या करनी पड़ी। हालाकि उनके दोष को कई लोगों ने अपने उपर लिया। जैसे नारी, गोंद वाले वृक्ष, नदियों एवं समुद्र ने उनका पाप अपने उपर लिया। उन सभी को वरदान भी मिला। लेकिन, उन्हें दोष से मुक्ति के लिए यहां तपस्या करनी पड़ी। सिद्धाश्रम का अपना विशेष महत्व है। जिसके कारण यहां देवता व तपस्वी आकर साधना करते रहे हैं। हमें इस पर गर्व होना चाहिए। यहां सभी प्रमुख देवताओं ने आकर तपस्या की है। इस तरह के प्रमाण अन्य कथाओं में भी मिलते हैं। हजारों ऋषि व देवता समय-समय पर यहां आते रहे हैं और श्राप से उन्हें मुक्ति मिली है।

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