ऐसे जिलाधिकारी : जो लगाते हैं बच्चों की पाठशाला

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बक्सर खबर : उस व्यक्ति की प्रशंसा होनी चाहिए। जो लीक से हटकर कुछ करने का माद्दा रखता है। हम बात कर रहे हैं बक्सर के डीएम रमण कुमार की। वह प्रत्येक दिन कुछ न कुछ समय निकालकर बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए स्वयं उनकी पाठशाला लगाते हैं। यह उनकी रोज की दिनचर्या है। इतना ही नहीं सप्ताह में प्रत्येक शनिवार को नौवीं एवं दसवीं के छात्रों के लिए विशेष कार्यशाला का आयोजन करते हैं। उनके लिए कैरियर डेवलपमेंट से जुड़े टीप्स देते हैं। दो से ढ़ाई घंटे तक चलने वाली कार्यशाला में विशेष ट्रेनर बुलाए जाते हैं। जो किसी विषय अथवा प्रायोगिता परीक्षाओं की बिंदू वार जानकार देते हैं। डीएम की इस पाठशाला में उनके साथ जिला शिक्षा पदाधिकारी, बेहतर जानकारी रखने वाले तेज-तर्रार अफसर भी साथ रहते हैं। जो अपना अनुभव छात्र-छात्राओं के साथ साझा करते हैं। जिससे वह अपने भविष्य की तैयारी को मुकम्मल कर सकें। साप्ताहिक कार्यशाला में सरकारी व निजी सभी विद्यालयों के छात्र आमंत्रित किए जाते हैं।

डीएम की पाठशाला में शामिल छात्राएं
डीएम की पाठशाला में शामिल छात्राएं

डीएम द्वारा दिया गया आज का ज्ञान
बक्सर : 23 अप्रैल को समाहरणालय में आयोजित कार्यशाला में डीएम ने बच्चों के मोरल डेवलपमेंट की शिक्षा दी। आज का दिन कुछ खास था। क्योंकि इसमें सिर्फ छात्राएं एवं उनके विद्यालय के प्राचार्य शामिल हुए। रमण कुमार ने कहा आप अपने आप को बेहतर बनाते हैं तो इससे राष्ट्र व राज्य का विकास भी प्रभावित होता है। क्योंकि देश और प्रदेश की उन्नति में आप आगे चलकर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करते हैं। इसके लिए जरुरी है आप अपने आचार, व्यवहार एवं अध्ययन के तौर तरीके को बेहतर बनाए। आपने देखा होगा। न्यूज पढ़ते हुए एंकर किस शालीनता और एकाग्रता से अपनी जगह पर बैठती हैं। अधिकारी किस तरह अपने कार्यालय में बैठते हैं। आप भी उसी तरह पुरी तैयारी के साथ अपनी कक्षा में बैठें। इससे आपके नजरिए में बदलाव देखने को मिलेगा। घर हो विद्यालय, आप अपने तौर तरीके में बदलाव करें।

शिक्षा विभाग भी जुड़ा है अभियान में
बक्सर : छात्रों के बेहतर भविष्य के लिए जिलाधिकारी द्वारा किए जा रहे प्रयास में शिक्षा विभाग भी जुड़ गया है। प्रत्येक दिन की कक्षा के लिए पहले से विद्यालयों को चिह्नित कर लिया जाता है। उनके प्रधानाध्यापकों को सूचना दी जाती है। वे समय से अपने छात्रों के साथ उपस्थित रहते हैं। साथ ही योग्य शिक्षकों को भी विषयवार जानकारी देने के लिए तैयार रखते हैं।
बेहतर हैं परिणाम, खुशनुमा रहता है माहौल
बक्सर : अपनी इस पाठशाला में डीएम बच्चों को प्रशासनिक तौर तरीके व उनके अधिकार की जानकारी भी देते हैं। वे अपने और छात्रों के बीच किसी तरह का तनाव बोध पैदा नहीं होने देते। वे अपने आप को सहज महसूस करें। इस पर उनका पूरा ध्यान रहता है। साथ ही बच्चों को कभी पीने के लिए फ्रूटी जूस तो कभी टाफी मिलती है। है न जमे की पाठशाला। कभी-कभी इस कक्षा में शामिल हुए छात्रों से हमारी भी बात होती है। वे कहते हैं बहुत अच्छा लगा। हम भी डीएम भी बनेंगे। यह देख और सून एहसास होता है। डीएम के इस प्रयास के परिणाम बेहतर हैंं।
(फिलहाल इतना ही-शेष अगले शनिवार ) 

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