बक्सर खबर। जलहरा के प्राइवेट स्कूल में पढऩे वाले दीपक अब सी आई एस एफ में सब इंस्पेक्टर हैं। यह गांव शिक्षा का हब नहीं राजपुर प्रखंड का छोटा सा गांव है। यहीं पास में कोनौली गांव सटा है। होली में अपने नाना गांव आए दीपक ने बताया परिश्रम करने वाले के लिए आज भी नौकरी दूर नहीं। लेकिन, पढऩा तो होगा। बगैर परिश्रम के खेत में फसल भी नहीं उगाई जा सकती। मैं पढ़ाई करने के लिए कहीं दूर नहीं गया। मूल रुप से मेरा गांव मंगरांव हैं। जो राजपुर प्रखंड में आता है। पिता उमाशंकर गुप्ता फौज में थे। हम तीन भाई मां के साथ नाना के यहां कोनौली आ गए। यहीं रहते हुए नाना जी के अनुशासन में हम पले बढ़े। गांव से ही प्रारंभिक शिक्षा पूरी की। मैट्रिक ईशान इंटरनेशनल स्कूल से पूरा किया।

बीएन कालेज और पटना कालेज से इंटर तथा स्नातक। वहीं रहकर एसएससी की तैयारी करने लगा। 2017 में एसएससी सीपीओ की परीक्षा दी और मेरा चयन सी आई एस एफ में हो गया। 2018 से जनवरी 2019 के बीच हैदराबाद के निशा एकेडमी में प्रशिक्षण हुआ और दिल्ली में पोस्टेड हूं। मेरे नाना जी फिरंगी साह ने हम सभी को बड़े ही अनुशासन में रखा। बड़े भाई दिलीप कुमार फिल्म लाइन में हैं। उनकी एक फिल्म अनार कली आफ आरा 2017 में प्रदर्शित हुई थी। छोटा भाई जामिया विश्वविद्यालय से पास आउट है। हम तीनों भाई बहुत खुश हैं। जो हमें नाना जी का मार्गदर्शन मिला। मां और पिता जी चाहते थे। बेटा अफसर बने। मैंने छोटी कोशिश की। कुछ ज्यादा परिश्रम करता तो शायद और अच्छा करता। आज गांव के युवकों के पास भी बहुत से अवसर हैं। पहले का दौर नहीं। उन्हें पढ़ाई करनी चाहिए। यह हैं दीपक कुमार के विचार। उन्होंने अपनी स्टोरी हमारे साथ शेयर की। और हम आप पाठकों के साथ कर रहे हैं। ताकि हर युवा यह जान ले नौकरी बहुत मुश्किल नहीं। पर रेस में आगे निकलने के लिए दौडऩा तो होगा।

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