‌‌‌हरतालिका -तीज व्रत आज, दोपहर तक पूजा का मुहूर्त

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बक्सर खबर। सुहागन स्ति्रयों द्वारा मनाया जाने वाला तीज व्रत आज है। हालाकि आज ही चतुर्थी तिथि प्रारंभ हो जा रही है। इस लिए कई लोग इसको लेकर उहापोह में हैं। लेकिन शास्त्रीय मान्यता के अनुरुप आज ही इस व्रत को मनाना श्रेयकर है। दिन के दस बजे के उपरांत चतुर्थी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। लेकिन हस्त नक्षत्र होने के कारण आज 2 सितम्बर को दोपहर 1:35 तक पूजा का समय है। यह व्रत मांता पार्वती का व्रत है। जिसे कभी उन्होंने भगवान शिव को पति रुप में प्राप्त करने के लिए किया था। उसी का अनुश्रवण करते हुए सुहागन स्ति्रयां अपने पति के लिए व्रत करती हैं। कठोर व्रत है। व्रति महिलाएं पानी भी ग्रहण नहीं करतीं। अर्थात पूजन के साथ तपस्या का फल भी निहित है।

व्रती महिलाएं भगवान शिव-पार्वती और गणेश तथा कार्तिक भगवान की एक साथ पूजा करती हैं। पंडित नरोत्तम द्विवेदी बताते हैं। पारण का समय 3 सितम्बर को सुबह 6:45 बजे से पहले तक है। उनसे जब पूछा गया कि तृतीया तिथि तो आज दोपहर बाद समाप्त हो रही है। इससे व्रत पर कोई प्रभाव तो नहीं। उन्होंने बताया जिस तरह दशमी युक्त एकादशी नहीं की जाती। द्वादशी युक्त की जाती है। उसी तरह द्वितीया युक्त तीज नहीं करनी चाहिए। द्वितीया तिथि पितामह के लिए होती हैं। तृतीया पति के लिए और चतुर्थी पुत्र के लिए। इस वजह से आज प्रारंभ हुआ व्रत मंगलवार की सुबह संपन्न होगा।

क्या है व्रत का विधान 
बक्सर खबर। व्रत को करने का विधान बहुत की कठोर है। ऐसी मान्यता है इसे कभी माता पार्वती ने भगवान शंकर को पाने के लिए किया था। इस वजह से सुहागिन महिलाओं के साथ कुंवारी कन्याएं भी अच्छे पति की मनोकामना के साथ व्रत रखती हैं। शिव, पार्वती एवं गणेश की प्रतिमा मिट्टी अथवा बालू से बनाते हैं। उनकी पूजा कर अखंड सौभाग्य की मनोकामना की जाती है। बिहार और यूपी के कुछ जिलों में ऐसी मान्यता है कि महिलाएं थूक भी नहीं घोंट (निगल ) सकतीं हैं।
श्रृंगार का है विशेष महत्व 
बक्सर खबर। सुहागिन स्त्रियों के लिए तीज व्रत में श्रृंगार का विशेष महत्व बताया गया है। इस लिए महिलाएं नए वस्त्र पहन, सजधज कर फल आदि का प्रसाद चढ़ा भगवान शिव-पार्वती की पूजा करती हैं।

आज की रात्रि चन्द्रदर्शन है निषेध
बक्सर खबर। चौथ का चांद देखना शास्त्रों के अनुसार निषेध है। इसे देखने से लांछन लगता है। जिसके कारण लोग दुख अथवा लोक निंदा के भागी होते हैं। इस लिए शास्त्रों में ऐसा वर्णन मिलता है कि भाद्रपद में चौथ की चांद का दर्शन नहीं करना चाहिए।
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